कर्ज संकट ने एक बार फिर यूरो जोन को मंदी की चपेट में लिया है। जर्मनी और फ्रांस की आर्थिक हालात में आया सुधार भी यूरो जोन को मंदी से बचाने में नाकाम साबित हुआ और 2009 के बाद यूरो जोन फिर से मंदी की चपेट में आ गया है।
बृहस्पतिवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, यूरो जोन की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं जर्मनी और फ्रांस जुलाई-सितंबर की अवधि में 0.2 फीसदी वृद्धि दर बनाए रखने में कामयाब रही, लेकिन यह सुधार भी खर्चों पर लगाम लगाने में जुटे 17 देशों के यूरो जोन को नहीं बचा सके। नीदरलैंड, स्पेन, इटली और ऑस्ट्रिया जैसी यूरो जोन की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं काफी दबाव में हैं।
जुलाई-सितंबर तिमाही में यूरो जोन की जीडीपी 0.1 फीसदी गिर गई, दूसरी तिमाही में इसमें 0.2 फीसदी की गिरावट आई थी। लगातार दोनों तिमाहियों में आई गिरावट से 94 खरब यूरो वाली यूरो जोन की अर्थव्यवस्था एक बार फिर मंदी की चपेट में आ गई। हालांकि, इटली और स्पेन पिछले एक साल से आर्थिक दबाव में हैं और यूनान भारी आर्थिक संकट से जूझ रहा है।
गौरतलब है कि कर्ज संकट की शुरुआत 2009 के आखिर में यूनान में शुरू हुआ और पूरे विश्व में फैल गया। 2008-09 में शुरू हुआ आर्थिक मंदी का असर अभी भी दुनिया में छाया हुआ है। कॉमर्स बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री जॉर्ज क्रेमर का कहना है कि जर्मनी की अर्थव्यवस्था के लिए यह अंतिम बार आए बेहतर आंकड़े हैं।
अधिकांश अर्थशास्त्री मानते हैं कि 2011 के बाद से पहली बार चौथी तिमाही में जर्मनी की जीडीपी में गिरावट आएगी। जर्मनी में सुस्ती के बाद फ्रांस की अर्थव्यवस्था पर भी संकट गहराएगा। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अक्तूबर-दिसंबर अवधि में दोनों देशों की जीडीपी में गिरावट आ सकती है।