सरकारी खजाने पर सब्सिडी का बोझ घटाने में जुटे वित्त मंत्रालय की नजर अब ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर है। इस साल पेट्रोलियम सब्सिडी का बोझ एक लाख 63 हजार करोड़ से ऊपर पहुंच गया है। वित्त मंत्रालय की कोशिश है कि सब्सिडी का कुछ बोझ ऑयल मार्केटिंग कंपनियां खुद भी वहन करें।
इसके लिए एक प्रस्ताव पेट्रोलियम मंत्रालय को भेजा गया है। वित्त मंत्रालय की कोशिश है कि किसी भी सूरत में ईंधन सब्सिडी का बोझ सरकारी खजाने पर न बढ़े, बल्कि इसकी कुछ भरपाई ऑयल मार्केटिंग कंपनियों से करवाई जाए।
वित्त मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को अंडर रिकवरी कम करने के लिए डीजल के दाम चरणबद्ध तरीके बढ़ाने की छूट दिए जाने के बाद सब्सिडी के बोझ को कम करने के उपाय तलाशे जा रहे हैं।
इसके लिए अंडर रिकवरी तय करने के फार्मूले के बदलाव के साथ-साथ सब्सिडी का कुछ बोझ ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर डालने की कोशिश चल रही है। वित्त मंत्रालय के प्रस्ताव के अनुसार, ऑयल सब्सिडी में से करीब 5 हजार करोड़ रुपये का भार ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को उठाना चाहिए।
फिलहाल ईंधन सब्सिडी का करीब 35 फीसदी भार ओएनजीसी और गेल जैसी सरकारी पेट्रोलियम उत्पादक कंपनियां उठाती हैं, जबकि बाकी सरकार को वहन करना पड़ता है।
मार्केटिंग कंपनियों के बढ़ते घाटे को पूरा करने के लिए डीजल के दाम चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने की छूट दिए जाने के बाद वित्त मंत्रालय सब्सिडी के बोझ को और ज्यादा नहीं बढ़ने देना चाहता है।
इस साल बजट में सरकार ने राजकोषीय घाटे को कम कर 4.8 फीसदी तक लाने का लक्ष्य तय किया है। इसे हासिल करने के लिए वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ईंधन सब्सिडी पर काबू पाने में जुटे हैं।