लगभग छह वर्ष तक उपक्रम के सफल होने का इंतजार करने के बाद एनटीपीसी लिमिटेड ने संयुक्त उपक्रम भारत फोर्ज-एनटीपीसी एनर्जी सिस्टेम्स लिमिटेड से निकलने का फैसला किया है।
पावर सेक्टर में सुस्ती के कारण यह उपक्रम वित्तीय रूप से वहनीय नहीं रह गया है। सार्वजनिक उपक्रम (पीएसयू) के अधिकारियों का कहना है कि एनटीपीसी ने 2008 में एक मैन्यूफैक्चरिंग फैसिलिटी लगाने के लिए बीएफएल के साथ जेवी बनाया था।
इस फैसिलिटी में हाई-इंड टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट जैसे एडवांस्ड क्लास पंप्स, सीमलेस हाई प्रेशन पाइप्स, पाइपिंग सॉल्यूशंस, कास्टिंग और हाई एलॉय स्टील तैयार किया जाना था। लेकिन कोयले की कमी और भूमि अधिग्रहण जैसे मसलों के कारण पावर सेक्टर सुस्ती की गिरफ्त में आ गया। इसकी वजह से यह उपक्रम मुनाफे का सौदा नहीं रह गया। पावर सेक्टर को गैस और कोयले की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। इससे कई पावर प्रोजेक्ट बेकार पड़े हैं। पिछले लगभग चार वर्षों से पावर सेक्टर में धारणा नकारात्मक बनी हुई है और इस स्थिति में बदलाव की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है।
भारत के पावर सेक्टर में सुस्ती के कारण टेक्नोलॉजी पार्टनर्स ने जेवी के साथ गठजोड़ करने से इनकार कर दिया या सेक्टर में निवेश करना मुनाफे का सौदा न होने के कारण रूचि नहीं दिखाई। यह कयास लगाया जा रहा था कि तीसरा पार्टनर टेक्नोलॉजी बैकअप के साथ पावर इक्युपमेंट बनाने के लिए उपक्रम में शामिल होगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। संयुक्त उपक्रम में भारत फोर्जे की हिस्सेदारी 51 फीसदी है जबकि शेष 49 फीसदी हिस्सेदारी एनटीपीसी के पास है। कंपनी की मैन्यूफैक्चरिंग फैसिलिटी महाराष्ट्र के सोलापुर में लगाई जाने वाली थी।