पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा है कि ईंधनों के दाम बढ़ाने से संबंधित केलकर समिति की सिफारिश महज एक प्रस्ताव है। समिति की सभी सिफारिशें अभी प्रस्ताव के स्तर पर ही हैं। इस रिपोर्ट पर फिलहाल मंत्रालय ने कोई निर्णय नहीं किया है। यानी, डीजल के दाम तुरंत बढ़ने के आसार नहीं हैं।
उद्योग संगठन एसोचैम के एक कार्यक्रम में मोइली ने कहा कि फिलहाल डीजल के दाम बढ़ाने को लेकर कोई प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष नहीं रखा गया है। उल्लेखनीय है कि विजय केलकर समिति की सिफारिशों को अगर सरकार मान लेती है तो देश के राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए जल्द ही डीजल, केरोसिन और रसोई गैस की कीमतों में इजाफा किया जा सकता है।
वित्त मंत्रालय की ओर से गठित केलकर समिति ने ईंधनों के दाम में तत्काल बढ़ोतरी की सिफारिश की है। समिति का कहना है कि वित्तीय वर्ष 2014-15 से डीजल के दाम पूरी तरह से बाजार के हवाले कर देना चाहिए। यानी पेट्रोल की तरह डीजल कीमतों पर से सरकारी नियंत्रण हटाने की वकालत की गई है। इसके अलावा एलपीजी और केरोसिन के दाम बढ़ाने का सुझाव भी दिया गया है।
मोइली ने कहा कि पेट्रोलियम मंत्रालय ईंधन आपूर्ति के लिए आयात पर निर्भरता कम करने का एक रोडमैप तैयार कर रहा है। बारहवीं पंचवर्षीय योजना में कच्चे तेल, गैस व अन्य स्रोतों के आयात पर निर्भरता कम करने को लेकर मंत्रालय गंभीर है। मंत्रालय की योजना के मुताबिक 2020 तक 50 फीसदी, 2025 तक 75 फीसदी और 2030 तक 100 फीसदी तक आयात कम करने का लक्ष्य रखा गया है।