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सरकारी कंपनियों का छोटे कारोबारियों से खरीदारी में रुख ठंडा

Sun, 21 Jul 2013 10:30 PM IST
नई दिल्ली/प्रशांत श्रीवास्तव
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छोटे और मझोले कारोबारियों के उत्पादों की खरीदारी में सरकारी कंपनियां ज्यादा उत्साह नहीं दिखा रही हैं।
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सरकारी खरीद नीति लागू होने के एक साल बाद कंपनियों ने केवल 10 हजार करोड़ रुपये की खरीदारी की है। जबकि कंपनियों को करीब 40 हजार करोड़ रुपये की खरीदारी वित्त वर्ष 2012-13 में करनी थी।

कंपनियों की बेरुखी को देखते हुए अब सरकार खरीदारी की निगरानी ऑनलाइन करने की तैयारी कर रही है, जिससे कि छोटे कारोबारियों के लिए सरकारी खरीद में 20 फीसदी लक्ष्य को पूरा किया जा सके।
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सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि छोटे कारोबारियों से खरीद के लिए सरकारी खरीद नीति को लागू हुए एक साल हो गए हैं।

इसके तहत सरकारी कंपनियों द्वारा की गई खरीदारी की समीक्षा में यह बात सामने आई है कि लक्ष्य से कंपनियां अभी कहीं पीछे हैं।

अधिकारी के अनुसार केंद्र सरकार के कुल 94 सार्वजनिक उपक्रमों ने कुल 10 हजार करोड़ रुपये की ही खरीदारी की है। जो कि 20 फीसदी के लक्ष्य को देखते हुए बहुत कम है। इसे देखते हुए देश के 10 बड़े सार्वजनिक उपक्रमों के साथ बैठक की गई है।

बैठक में भेल, इंडियन ऑयल, गेल, बीएसएनएल, सेल, आरआईएनएल, एनटीपीसी आदि कंपनियां शामिल थीं। बैठक में यह बात निकलकर सामने आई है कि सरकारी कंपनियों और विभागों द्वारा की गई खरीदारी की निगरानी ऑनलाइन होनी चाहिए। साथ ही कंपनियों की जरूरत और मौजूदा कारोबारियों का भी विवरण ऑनलाइन होना चाहिए।

अधिकारी ने बताया कि इसे देखते हुए यह फैसला किया गया है कि सरकारी खरीद की निगरानी करने और कंपनियां का ब्योरा देने के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफार्म दिया जाएगा। जिससे न केवल सरकारी कंपनियों को छोटे कारोबारियों की जानकारी मिल सकेगी, वहीं कंपनियों की जरूरत के मुताबिक उत्पाद बनाना भी छोटे कारोबारियों के लिए आसान होगा।

साथ ही कंपनियों द्वारा की गई खरीदारी की लगातार निगरानी हो सकेगी, जिससे लक्ष्यों को हासिल करना आसान हो जाएगा।

सरकारी खरीद नीति
सरकारी खरीद नीति एक अप्रैल 2012 से लागू है, जिसके तहत केंद्र सरकार की कंपनियों और विभागों को अपनी कुल खरीदारी में 20 फीसदी खरीदारी छोटे कारोबारियों (माइक्रो एंड स्मॉल) से करनी है।
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इसके तहत पहले तीन साल यह ऐच्छिक है, जबकि साल 2015 से यह कंपनियों के लिए अनिवार्य होगी। कंपनियों को छोटे कारोबारियों से की गई खरीदारी में 20 फीसदी खरीदारी अनुसूचित जाति और जनजाति के कारोबारियों से भी करनी है।
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