कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी मानेसर प्लांट पर अपनी स्थिति साफ करने लिए खुल कर अभी सामने नही आई है।
इस तरह की आशंका जताई जा रही है कि कंपनी 500 करोड़ रुपये के अतिरिक्त मुआवजे की मांग को देखते हुए मानेसर प्लांट को बंद कर सकती है।
कंपनी से 600 एकड़ जमीन के एवज में यह मुआवजा मांगा जा रहा है। हालांकि कंपनी अभी भी पूरे मामले पर कुछ भी कहने से इंकार कर रही है।
यह पूरा विवाद साल 2011 में तब शुरू हुआ, जब पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने अधिग्रहीत की गई 600 एकड़ जमीन के एवज में मारुति को अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया था। जिस आदेश के आधार पर हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन कंपनी से 500 करोड़ के मुआवजे की मांग कर चुका है। इसके बाद मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंचा। जहां न्यायालय ने दोबारा पक्षों को उच्च न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
कंपनी के प्रवक्ता से संपर्क किए जाने पर, उन्होंने इस पूरे मामले पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। ऐसे में अब मारुति का उच्च न्यायालय में क्या रुख होता है, उस पर ही प्लांट का भविष्य तय होगा। सूत्रों के अनुसार मारुति के लिए मानेसर प्लांट को बंद करना आसान नहीं है। ऐसा इसलिए है कि कंपनी के सबसे हिट ब्रांड स्विफ्ट और डिजायर का उत्पादन मानेसर प्लांट से होता है। साथ ही डीजल इंजन भी कंपनी यहीं बनाती है।
ऐसे में कंपनी के लिए प्लांट बंद करने का फैसला आसान नहीं होगा, पर यदि कंपनी के लिए स्थिति अनुकूल नहीं रहती है, तो वह गुजरात में बन रहे नए प्लांट पर उत्पादन शिफ्ट कर सकती है। कंपनी मेहसाणा जिले में चार हजार करोड़ की लागत से नया प्लांट लगा रही है, जिसमें साल 2015 के मध्य तक उत्पादन शुरू हो जाने की संभावना है।