मॉरीशस जैसे देशों के साथ दोहरे कराधान से बचाव की संधि (डीटीएए) के जरिए विदेशी निवेश पर छूट के मामले में बजट प्रावधान पर उपजे विवाद पर वित्त मंत्रालय ने स्पष्टीकरण दिया है। इसमें कहा गया है कि बजट में लिखे वाक्य का आशय वह नहीं है, जो लिखा गया है।
इन वाक्यों पर बजट चर्चा में बात होगी और आवश्यक संशोधन कर दिया जाएगा। कर मामलों पर चिदंबरम का यह पहला रोल बैक माना जा रहा है। बजट पेश होने के बाद टैक्स रेजिडेंसी सार्टिफिकेट (टीआरसी) संबंधी प्रावधान से संधियों के तहत सस्ती दरों का लाभ ले पाने में बाधक बनने को लेकर उठी आशंकाओं से वृहस्पतिवार को शेयर बाजार 291 अंकों का गोता लगा गया था।
देश में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने वाले वित्त मंत्री के रूप में ख्याति पाए चिदंबरम ने जब डीटीएए से संबद्ध आयकर की धारा 90 में सब सेक्शन 5 जोड़ा तो निवेशकों के बीच अफरा-तफरी मच गई। हालांकि शाम में वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने उन्हें स्पष्ट किया कि इस सब सेक्शन से मॉरीशस रूट से आने वाले निवेश से होने वाले कैपिटल गेन पर असर नहीं पड़ेगा।
शुक्रवार को वित्त मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति के जरिए स्पष्ट किया है कि सब सेक्शन 5 के आने के बावजूद सरकार की मंशा निवेशकों के टैक्स रेजिडेंसी सर्टिफिकेट (टीआरसी) पर सवाल उठाने की नहीं है। हालांकि इस सब सेक्शन में यह साफ लिखा है कि कर अधिकारी टीआरसी की असलियत की जांच कर सकते हैं।
अगर जांच उठाने का मुद्दा बरकरार रहता है, तो निवेशकों को कम कर लगाने वाले मारीशस, साइप्रस और सिंगापुर जैसे देशों से पैसा भारत भेजने में दिक्कत आ सकती है और निवेशक दोहरे कराधान से बचाव की संधि (डीटीएए) के तहत कम कर दरों का लाभ उठाने से वंचित हो सकते हैं।
विज्ञप्ति के जरिए यह साफ किया गया है कि वित्त विधेयक यानी बजट पर चर्चा के दौरान सरकार इस मुद्दे को देखेगी और खासतौर पर सब सेक्शन की भाषा में बदलाव किया जाएगा। टैक्स के मामले में यह एक तरह से वित्तमंत्री का पहला रोलबैक माना जा रहा है। इस विज्ञप्ति के आने के बाद से शेयर बाजार ने भी मजबूती की राह पकड़ी।
उल्लेखनीय है कई मामलों में किसी डीटीएए के बाहर के देश की कंपनियां मारीशस से टीआरसी लेकर भारत में निवेश कर कैपिटल गेन में छूट का फायदा लेती हैं। उनके टीआरसी पर सवालिया निशान उठाने और उन्हें भारतीय टैक्स अधिकारियों की जांच की जद में आने से खलबली मची और वित्त मंत्रालय से यह स्पष्टीकरण आया है। देश का करीब 42 फीसदी एफडीआई और 40 फीसदी एफआईआई निवेश मारीशस के रास्ते आया है।