अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत में नए आर्थिक सुधारों को जरूरी बताते हुए कहा है कि अगर ऐसा होता है, तो कोई वजह नहीं कि आने वाले वर्षों में भारत आठ फीसदी या उससे अधिक आर्थिक विकास दर को हासिल न कर पाए।
आईएमएफ ने मध्यम अवधि के अनुमान के तहत भारत की आर्थिक विकास दर 7.3 से 7.4 फीसदी रहने की बात कही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के एशिया-प्रशांत संभाग के तहत भारत के लिए एसिस्टेंट डायरेक्टर और मिशन चीफ पॉल कैशिन ने कहा कि इस बात में कोई संदेह नहीं है कि भारत 8,9 या उससे भी अधिक आर्थिक विकास दर के साथ आगे बढ़ सकता है। हालांकि इसमें कुछ वक्त लगेगा और इसके लिए आर्थिक सुधार को आगे बढ़ाने के कदम उठाने होंगे। कैशिन के मुताबिक देश में राजनीतिक स्थिरता का माहौल अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा है। इसके चलते कई अच्छे कदम उठाए गए हैं और कारोबारी भरोसे में भी सुधार आया है।
आईएमएफ के सीनियर रिप्रेेजेंटेटिव टॉम रिचर्डसन ने कहा कि हम पिछले करीब दो साल से भारत में ऐसे आर्थिक सुधारों के कदम उठाने की बात कह रहे हैं, जो कारोबार जगत के लिए अनुकूल हों और जो आर्थिक विकास को गति दें। उन्होंने ऊर्जा क्षेत्र में सुधार की खासतौर पर जरूरत जताई। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण और भू स्वामित्व जैसे मसले आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाएंगे क्योंकि देश में नई परियोजनाओं की मंजूरी और क्रियान्वयन इन पर निर्भर करेगा। इसके अलावा कृषि क्षेत्र में सुधार लाने के लिए भी कई तरह के कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
रिचर्डसन ने कहा कि भारत में खाद्य आपूर्ति अब भी काफी हद तक सरकार पर ही निर्भर है और देश की जन वितरण प्रणाली अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं है। ऐसे में आईएमएफ का मानना है कि देश में कृषि क्षेत्र और खाद्य आपूर्ति को बाजार आधारित बनाने की जरूरत है। डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए सब्सिडी का नकद हस्तांतरण और खाद्य सुरक्षा अधिनियम इस दिशा में उठाए गए कुछ ऐसे ही कदम हैं। यदि आधारभूत ढांचे (इन्फ्रासट्रक्चर) की बात करें, तो सार्वजनिक क्षेत्र के जरिए इसमें काफी काम किए जाने की जरूरत है।