रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (एसएंडपी) का कहना है कि पिछले सप्ताह संसद में पेश मोदी सरकार के पहले बजट से भारत की नकारात्मक रेटिंग में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा।
रेटिंग एजेंसी का कहना है कि रेटिंग में कोई बदलाव करने से पहले वह यह देखना चाहेगी कि बजट के प्रावधानों को सरकार किस प्रकार लागू कर पाती है, विशेषकर वित्तीय घाटा कम करने की दिशा में सरकार क्या कदम उठाती है।
बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि नई सरकार भी मार्च 2015 तक वित्तीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.1 फीसदी तक सीमित रखने के पिछले सरकार के लक्ष्य को लेकर चल रही है।
एसएंडपी के एसोसिएट डायरेक्टर अगोस्ट बेनार्ड ने टेलीकांफ्रेंसिंग के जरिए संवाददाताओं से बात करते हुए कि हमारा मानना है कि बजट से वित्तीय घाटा और ब्याज अनुपात में सुधार जारी रहेगा। लेकिन, यह देखने वाली बात होगी कि बजट में प्रस्तावित उपायों को किस हद तक लागू किया जा सकेगा। विशेषकर किस प्रकार वित्तीय घाटे को कम किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि दुनिया की तीन बड़ी रेटिंग एजेंसियों में सिर्फ एसएंडपी ने ही भारत की रेटिंग नकारात्मक रखी हुई है।