पच्चीस साल पुराने मोटर वाहन कानून की जगह लेने वाले सड़क यातायात एवं सुरक्षा विधेयक में भारी जुर्माने के अलावा ऑटो कंपनियों की जवाबदेही भी बढ़ाई गई है। सुरक्षा के लिहाज से डिफेक्टिव वाहन बेचकर अब कंपनियां अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच पाएंगी। ऐसे मामलों में 100 या इससे ज्यादा खरीदारों की शिकायत पर कंपनी को वाहन रिकॉल करना पड़ सकते हैं। ऐसे मामलों की निगरानी के लिए एक नेशनल अथॉरिटी बनेगी। सड़क सुरक्षा के मद्देनजर वाहनों के टाइप अप्रूवल, रजिस्ट्रेशन और रिकॉल के लिए नए कानून में काफी सख्त प्रावधान किए गए हैं। इन मानकों पर खरा उतरने के लिए वाहन निर्माता कंपनियों को सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर ज्यादा ध्यान देना होगा। हालांकि इससे कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ना भी तय है।
सड़क सुरक्षा के विशेषज्ञ एसपी सिंह का कहना है कि वाहनों के निर्माण के लिए टाइप अप्रूवल और कनफर्मिटी ऑफ प्रोडक्ट जैसी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की काफी कमी है। नए विधेयक में सुरक्षित वाहनों के निर्माण पर काफी ध्यान दिया गया है। वाहन में मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट की वजह से हुए सड़क हादसों में निर्माता 5 लाख रुपये तक का जुर्माना और 3 महीने की सजा हो सकती है। सिंह के मुताबिक, अभी तक देश में डिफेक्टिव वाहनों को अनिवार्य रूप से रिकॉल करने की कोई व्यवस्था नहीं है। नया कानून लागू होने के बाद फैक्ट्री के अलावा डीलर प्वाइंट पर वाहनों की जांच कर रिकॉल के आदेश दिए जा सकते हैं। इसके तहत वाहनों की खराबी को दुरुस्त करवाने के साथ-साथ सरकार ऑटो कंपनियों पर जुर्माना भी लगा सकती है। ऑटो कंपनियों को हरेक मॉडल में डिफेक्ट का डेटा नेशनल अथॉरिटी को भेजना अनिवार्य होगा, जिसके आधार पर वाहन रिकॉल करने के आदेश दिए जा सकते हैं।
अभी सड़क यातायात एवं सुरक्षा विधेयक, 2014 के मसौदे पर जनता की राय मांगी गई है। यह विधेयक शीतकालीन सत्र के दौरान संसद में पेश किया जाएगा। जानकारों का मानना है कि इस कानून के लागू होने में अभी साल भर का समय लग सकता है। रिकॉल से जुड़े सख्त प्रावधानों पर ऑटो कंपनियों को ऐतराज हो सकता है। सभी कारों और दुपहिया वाहनों के लिए हर पांच साल में फिटनेस टेस्ट कराना अनिवार्य किया जा रहा है।
नकली स्पेयर पार्ट्स पर लगेगा अंकुश
पहली बार वाहनों के स्पेयर पार्ट्स के लिए सरकार से कनफोर्मिटी सर्टिफिकेट अनिवार्य करने जा रही है। नए सड़क यातायात एवं सुरक्षा विधेयक में नकली स्पेयर पार्ट्स की बिक्री पर नकेल कसने के लिए कई सख्त प्रावधान किए गए हैं। अब स्पेयर पार्ट्स को भी कड़े सुरक्षा मानकों पर खरा उतरना होगा। इन मानकों के लागू करने के लिए ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियां दाम बढ़ा सकती हैं।
दुपहिया की ओवरलोडिंग पर 10 हजार जुर्माना
नए कानून में वाहनों की ओवरलोडिंग के मुद्दे को भी काफी गंभीरता से लिया गया है। ऑनलाइन शॉपिंग का माल घर-घर पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर दुपहिया वाहनों का इस्तेमाल हो रहा है। इसके मद्देनजर दुपहिया वाहनों की ओवरलोडिंग पर 10 हजार रुपये का जुर्माना तय किया गया है। भारी वाहनों की ओवरलोडिंग पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा। ओवरलोड वाहनों को नहीं रोकने के लिए अब टोल कंपनी और इलाके के पुलिस अधिकारी पर भी कार्रवाई की जा सकेगी।