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नए कंपनी कानून से खुलेगा नए कॉरपोरेट युग का रास्ता

Wed, 19 Dec 2012 09:44 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
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मंगलवार की देर शाम बहुप्रतीक्षित कंपनी अधिनियम को लोक सभा की मंजूरी मिल गई। राज्य सभा से मंजूरी और पश्चात राष्ट्रपति के अनुमोदन के बाद यह अधिनियम 1956 के कंपनी कानून की जगह ले लेगा। इस कानून के बनने के साथ ही कंपनी जगत में ढेर सारे परिवर्तन देखने को मिलेंगे। इससे जहां सरकार को आर्थिक सुधारों को गति देने में मदद मिलेगी, वहीं निवेशकों के हित सुरक्षित होंगे और कंपनियों को भी अपने काम में सुविधा मिलेगी। कंपनी बिल को पहली बार अगस्त 2008 में पेश किया गया था, लेकिन लोक सभा का सत्र समाप्त होने के बाद इसे वापस लेना पड़ा।
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वर्तमान स्वरूप में कानून बनने पर कुछ प्रमुख बदलाव ये होंगे:
-अब एक व्यक्ति भी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बना सकेगा
-निजी कंपनी में सदस्यों की अधिकतम संख्या 50 से बढ़कर 200 हो जाएगी
-कंपनियों को अपने शुद्ध लाभ का दो फीसदी सामाजिक कॉरपोरेट दायित्व पर खर्च करना होगा
-कंपनी के निदेशक का वेतन कंपनी के शुद्ध लाभ के पांच फीसदी से अधिक नहीं होगा
-अगर कोई कंपनी अपना कारोबार समेटती है, तो उसे अपने कर्मचारियों को दो माह का वेतन देना होगा
-सभी कंपनियों का वित्तीय वर्ष समान होगा यानी अप्रैल से मार्च, विशेष परिस्थितियों के लिए अनुमति लेनी होगी
-कॉरपोरेट धोखाधड़ी पर लगाम के लिए एसएफआईओ (सीरियस फ्रॉड इंवेस्टिगेशन ऑर्गनाइजेशन) को अधिक शक्ति मिलेगी
-कंपनी के दस्तावेज में घोषित तथ्यों के गलत पाए जाने पर कोई भी व्यक्ति या समूह आपराधिक मामला दर्ज करा सकेगा
-स्पेशल रिजोल्यूशन पारित कर कंपनियां जीडीआर (ग्लोबल डिपॉजिटरी रिसीट) जारी कर सकेंगी
-निजी आवंटन के मामले में रकम मिलने से 60 दिन के भीतर करना होगा आवंटन
-किसी कंपनी के अधिग्रहण में छद्म नामों का नहीं किया जा सकेगा उपयोग
-सूचीबद्ध कंपनी के एक तिहाई निदेशक स्वतंत्र निदेशक होंगे
-इन नियमों के अनुपालन के लिए एक साल का दिया जाएगा समय

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