नई चेक प्रणाली को देश के सभी क्षेत्रों तक नए साल से लागू करने में देरी हो सकती है। बैंकर्स के अनुसार 31 दिसंबर तक सभी नेटवर्क तक स्कैनर की पहुंच करना मुश्किल है। इसके अलावा नए फार्मेट वाली चेक बुकें भी छोटे शहरों और कस्बों में पहुंचने में देरी हो रही है। जिसकी वजह से छोटे शहरों और कस्बों में अभी भी पुरानी प्रणाली को लागू करना होगा। हालांकि चेक ट्रंकेशन सिस्टम (सीटीएस-2010) टियर-2 श्रेणी के शहरों में 1 जनवरी से लागू हो जाएगा।
भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को कहा है कि वह 1 जनवरी 2013 से नई चेक प्रणाली लागू करें। सीटीएस-2010 के लागू होने से ग्राहकों के चेक काफी कम समय में क्लीयर हो सकेंगे। अभी यह प्रणाली एनसीआर सहित देश के बड़े शहरों में लागू है, जिसके तहत खास तरह के चेक बैंक जारी करते हैं। आरबीआई के निर्देश के बाद बैंकों ने नई चेक बुक जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही ग्राहकों की पुरानी चेक बुक जमा करने की भी अपील की है। इसके बावजूद अभी नई चेक बुक छोटे शहरों और कस्बों में पहुंचने में देरी हो रही है।
एक सार्वजनिक बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि अभी छोटे शहरों और कस्बों में चेक क्लीयर होने के लिए उसे मूल रूप में इस्तेमाल करने की प्रक्रिया है। सीटीएस प्रणाली के तहत चेक को तस्वीर के जरिए क्लीयर किया जाता है। जिसके लिए स्कैनर की जरूरत होती है। यह प्रक्रिया जहां ज्यादा सुरक्षित है, वहीं इससे समय की काफी बचत होती है। एनसीआर जैसे बड़े क्षेत्रों में अभी एक निश्चित शाखाओं पर स्कैनर लगे हैं। जहां पर सभी शाखाओं के चेक क्लीयर के लिए भेजे जाते है।
पूरे देश में लागू करने के लिए सभी शाखाओं को इसके लिए तैयार करना होगा। जिले के मुख्यालय के बाद गांव, कस्बों में भी बैंकों की शाखाएं हैं। साथ ही कई क्षेत्रों में बैंक की दो शाखाओं के बीच 30-35 किलोमीटर की दूरी है। ऐसे में इन सभी क्षेत्रों में नई प्रणाली के लिए स्कैनर की जरूरत होगी, जो कि खर्चीला होने के साथ-साथ बचे 15 दिनों में पहुंचाना भी मुश्किल है। अधिकारी के अनुसार इसे देखते हुए छोटे शहरों और कस्बों में लागू करने में देरी हो सकती है। हालांकि लखनऊ, चंडीगढ़, भोपाल जैसे शहरों में इसे तय समय-सीमा में लागू कर लिया जाएगा।
गौरतलब है कि चेक क्लीयरेंस में तेजी लाने और चेकों से जुड़े फ्रॉड पर शिकंजा कसने के लिए सरकार ने 1 जनवरी से देश में सीटीएस -2010 प्रणाली लागू करने की घोषणा की है। सीटीएस -2010 फार्मेट में चेकों के फिजिकल क्लीयरेंस की जरूरत पूरी तरह खत्म हो जाएगी। क्लीयरेंस प्रक्रिया पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक हो जाएगी, जोकि चेक पर अंकित इलेक्ट्रानिक कोड और इमेज के आधार पर काम करेगी।
चेक पर अंकित इन जानकारियों को कैप्चर करके उन्हीं के आधार पर चेक को क्लीयर किया जाएगा। नए चेकों में ऐसे कई फीचर होंगे जिनके चलते इनकी डुप्लीकेसी या कोई फ्रॉड करना तकरीबन नामुमकिन होगा। चेक पर एक अदृश्य अल्ट्रा वायलेट (यूवी) स्याही से बैंक का लोगो छपा होगा, जो केवल यूवी रोशनी में ही दिखेगा। इसके अलावा चेक पर एक खास तरह का वीओआईडी फोटोग्राफ अंकित होगा, जोकि चेक के लिए कोड का काम करेगा।
चेक पर चेक प्रिंटर की जानकारी के साथ सीटीएस- 2010 अंकित होगा। नए चेकों में रकम को अंकों में भरने के लिए दिए गए बॉक्सों के आगे रुपये का प्रतीक चिह्न भी अंकित होगा। इसके अलावा पांचवां नया फीचर यह होगा कि नए फीचर पर आपको हस्ताक्षर एक निर्धारित स्थान पर ही करना होगा। इसे दर्शाने के लिए चेक पर एक बॉक्स में ‘प्लीज साइन अबव’ यानी कृपया इसके ऊपर हस्ताक्षर करें लिखा होगा। हस्ताक्षर की ठीक से स्कैनिंग के लिए ग्राहक को इसी स्थान पर दस्तखत करना होगा।