देश के सार्वजनिक बैंकों की एटीएम विस्तार की योजनाएं छह महीने से ज्यादा देरी से चल रही हैं। नए एटीएम लगने में देरी की वजह से छोटे शहर के ग्राहकों को खास तौर आने वाले दिनों में दिक्कतों का सामना कर पड़ सकता है।
वित्त मंत्रालय ने एक साल पहले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को कनशोर्शियम बनाकर एक साथ नए एटीएम लगाने संबंध निर्देश दिए थे। इसके बाद से भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व में 40 हजार एटीएम के लिए टेंडर जारी किए गए थे। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और उसे लागू होने में देरी की वजह से प्रमुख बैंकों की एटीएम विस्तार की योजनाएं छह महीने से ज्यादा पीछे चल रही हैं।
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि नई प्रक्रिया अपनाए जाने से बैंकों के एटीएम विस्तार पर असर पड़ा है। बैंक की योजनाएं छह महीने से ज्यादा देरी से चल रही हैं। हालांकि, अब टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो गई है। अब पूरी तरह से वेंडर पर निर्भर है कि बैंकों को वह कब एटीएम की आपूर्ति करते हैं। ऐसे में सामान्य स्थिति आने में थोड़ा समय लगेगा। अधिकारी के अनुसार, सेंट्रल बैंक की इस साल एक हजार से ज्यादा एटीएम लगाने की योजना है। इसमें से 220 के करीब उत्तर भारत में लगाए जाने हैं।
आईडीबीआई बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नए एटीएम में देरी होने की वजह से छोटे शहरों में खास तौर से असर होगा। वहां पर प्रति ग्राहक एटीएम का औसत कम है। हालांकि, आरबीआई ने हाल ही में बैंकों को यह कहा है कि जबतक सारी प्रक्रिया सामान्य नहीं हो जाती, तबतक शाखा में वह नए एटीएम लगा सकते हैं।
वित्त मंत्रालय ने सितंबर 2011 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से कहा था कि वह लागत में कमी करने और आपस में प्रतिस्पर्धा न करने के लिए समूह बनाकर एक साथ एटीएम खरीदें। प्रक्रिया पूरी न होने तक बैंकों के छोटे शहरों में एटीएम विस्तार पर रोक लग गई थी, जिसके बाद जनवरी 2012 में बैंकों ने एसबीआई के नेतृत्व में टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी।