अभी तक यह सुविधा बैंक और हाउसिंग फाइनेंस कंपनी से फ्लोटिंग रेट पर लोन लेने वाले ग्राहकों को मिलती थी। ग्राहकों को यह सुविधा फ्लोटिंग रेट पर लिए गए कर्ज पर मिलेगी। एनबीएफसी प्रमुख रुप से 2 फीसदी प्री-पेमेंट पेनॉल्टी के रुप में ग्राहकों से लेती हैं।
फ्लोटिंग रेट के लोन पर प्री-पेमेंट पेनॉल्टी प्रावधान खत्म सोमवार को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि वह फ्लोटिंग रेट पर दिए गए टर्म लोन पर किसी तरह प्री-पेमेंट पेनॉल्टी ग्राहकों से न ले। रिजर्व बैंक के अनुसार ग्राहकों के हितों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। आरबीआई के इस कदम का फायदा ऑटो लोन, हाउसिंग फाइनेंस कंपनी के अलावा दूसरी फाइनेंस कंपनी से लिए गए होम लोन, पर्सनल लोन, उपकरण लोन आदि पर ग्राहकों को मिलेगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने इसके पहले साल 2010 में होम लोन ग्राहकों को प्री-पेमेंट पेनॉल्टी खत्म करने की सलाह दी थी। बैंकों के बाद नेशनल हाउसिंग बैंक ने फाइनेंस कंपनियों को भी पेनॉल्टी खत्म करने का प्रवाधान कर दिया था। करीब तीन साल पहले होम लोन ग्राहकों को मिलने वाली यह सुविधा अप्रैल 2014 से बैंक से लोन लेने वाले सभी तरह के कर्ज पर ग्राहकों को मिलने लगी थी। रिजर्व बैंक की इस नई कवायद से किसी तरह का कर्ज लेने वाले ग्राहकों को अपने बैंक, फाइनेंस कंपनी आदि को प्री-पेमेंट पेनॉल्टी चुकाने से मुक्ति मिल गई है।
क्या होती है प्री-पेमेंट पेनॉल्टीग्राहक जब किसी लोन को उसके चुकाने की अवधि पूरी होने से पहले चुकाता है, तो एनबीएफसी समय से पहले चुकाने के एवज मे पेनॉल्टी लेती है। इसके तहत कंपनी बची राशि के आधार पर 2 फीसदी या उससे ज्यादा पेनॉल्टी ग्राहक से लेती है। आरबीआई की नई कवायद से ग्राहकों को अब किसी भी तरह की पेनॉल्टी नहीं देनी होगी।