ग्रोथ के लिए संघर्ष कर रही अर्थव्यवस्था, बड़े पैमाने पर गैर निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में फंसा इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर और सुधार प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3 जनवरी को पुणे में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसयू) के प्रमुखों के साथ गहन विचार विमर्श करेंगे।
इस बैठक को ज्ञान संगम नाम दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी और बैंकर्स के बीच विचार विमर्श का प्रमुख विषय बढ़ते एनपीए की समस्या का समाधान करने के साथ पीएसयू बैंकों को ज्यादा वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता देना होगा।
केंद्र सरकार ने पहले ही संकेत दिया है कि वह पीएसयू बैंकों में 52 फीसदी तक हिस्सेदारी कम करने की तैयारी कर रही है। इससे बैंकिंग सेक्टर में 1 लाख करोड़ रुपये प्रवाहित किए जा सकेंगे।
पुणे में दो दिवसीय रिट्रीट में बैंक प्रमुखों के साथ विचार विमर्श में प्रधानमंत्री मोदी के साथ वित्त मंत्री अरुण जेटली और रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन इन सवालों के जवाब तलाशेंगे कि अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर क्या गलत हुआ और पीएसयू बैंकों की स्थिति को मजबूत बनाने के लिए बैंकों और सरकार की ओर से क्या किया जाना चाहिए।
बैठक में क्षमता, पूंजी की जरूरत, रिस्क प्रोफाइलिंग और कर्ज की रिकवरी को बेहतर बनाने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की मजबूती और पुनर्गठन जैसे मुद्दों पर भी विचार विमर्श किया जाएगा।
बैठक में सुधारों की कार्ययोजना का ब्लूप्रिंट तैयार करने का प्रयास भी किया जाएगा, जिसे बैंकों और सरकार द्वारा लागू किया जा सके। मोदी विभिन्न आर्थिक मुद्दों पर विशेषज्ञों से नए और अलग सुझाव भी मांग सकते हैं।
वित्तीय समावेशन, वित्तीय साक्षरता, डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर, प्राथमिकता क्षेत्र को कर्ज, ब्याज में छूट और मानव संसाधन जैसे विषयों पर भी बैठक में विचार विमर्श किया जाएगा। सितंबर 2014 तक पीएसयू बैंकों का कुल एनपीए 2.43 लाख करोड़ रुपये रहा है।