ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारतीय बैंकों के लिए अपना आउटलुक निगेटिव बनाए रखा है। मूडीज के मुताबिक ऊंची ब्याज दरें और सुस्त आर्थिक रफ्तार के चलते बैंकों का मुनाफा घट रहा है, जिससे भविष्य में उनकी एसेट क्वालिटी और खराब हो सकती है। मूडीज ने कहा है कि भारतीय बैंकिंग सिस्टम को लेकर उसका पूर्वानुमान अगले 12-18 महीने के लिए निगेटिव बना रहेगा। नवंबर 2011 से मूडीज ने भारतीय बैंकिंग सिस्टम का आउटलुक निगेटिव बनाए रखा है। इससे साफ है कि भारतीय बैंकों के घरेलू परिचालन की स्थिति आगे भी चुनौतीपूर्ण बनी रहेगी।
मूडीज ने बैंकिंग सिस्टम में मार्च 2012 तक की परिसंपत्तियों के आधार पर करीब 66 फीसदी की हिस्सेदारी रखने वाले कुल 15 सरकारी और निजी बैंकों के आर्थिक हालात का आकलन किया और उनकी साख निर्धारित की। सरकारी क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए चालू वित्तवर्ष की दूसरी तिमाही में बढ़कर 4.01 फीसदी हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि में 3.06 फीसदी था। एजेंसी के मुताबिक, लंबी अवधि के रेटिंग पैमाने पर बैंकों की औसत क्रेडिट मजबूती डीप्लस या बीए1 है। जबकि, बैंकों की लंबी अवधि के लिए औसत विदेशी मुद्रा की जमा रेटिंग बीएए3 है। यह इनवेस्टमेंट ग्रेड का स्तर है।
मूडीज ने भारत में सुस्त आर्थिक वृद्धि, उच्च महंगाई दर, ऊंची ब्याज दरें और घरेलू मुद्रा की कमजोर स्थिति पर चिंता जताई है। मूडीज के वाइस प्रेसिडेंट एवं वरिष्ठ विश्लेषक विनीत गुप्ता का कहना है कि इन वजहों से बैंकों की एसेट क्वालिटी भविष्य में और बिगड़ सकती है, जिससे उनकी लागत बढ़ेगी और मुनाफा कम होगा। उन्होंने कहा कि मूडीज की रेटिंग वाले भारतीय बैंकों के लिए अपनी पूंजी को मौजूद स्तर पर बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा। जबकि कुछ बैंकों को बाहर से नई पूंजी जुटाने की जरूरत पड़ेगी। हालांकि, भारतीय बैंकों का एक सकारात्मक पक्ष यह है कि उनकी बिजनेस फ्रेंचाइजी बहुत मजबूत है।