भारत के बैंकों की नकारात्मक रेटिंग बरकरार रखने के एक दिन बाद ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने आने वाले दिनों में देश की रेटिंग में सुधार की संभावना जताई है। मूडीज ने कहा कि केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा आर्थिक एवं वित्तीय मोर्चे पर उठाए गए कदमों को अगर ठीक से लागू किया जाए, तो यह आर्थिक विकास में तेजी ला सकते हैं। यह देश की रेटिंग सुधारने में मददगार साबित हो सकता है।
मूडीज ने सिंगापुर में भारत की आर्थिक विकास दर पर हाल में उठाए हुए नीतिगत बदलावों के असर पर जारी अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि हाल में उठाए गए कदम वृद्धि कारक हैं और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर को जारी रखने के लिए अनुकूल हैं। इन कदमों से देश की मौद्रिक साख (सॉवरेन रेटिंग) में सुधार की राह में आड़े आ रही कुछ बाधाओं का समाधान हो सकता है।
रिपोर्ट में मूडीज ने सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का जिक्र करते हुए कहा है कि इसके तहत सरकार ने श्रम और निवेश संबंधी नीतियों में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव लाने की कोशिश की है। मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में सरकार की ओर से वित्तीय समावेशन और मूलभूत ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के विकास के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की है।
एजेंसी ने कहा है कि महंगाई के स्तर के लक्ष्य में स्पष्टता और बैंकिंग व ऊर्जा क्षेत्र में किए जा रहे सुधार सही दिशा में उठाए जाने वाले कदम हैं। यह सभी उपाय मिलकर देश की विशाल और विविधतापूर्ण अर्थव्यवस्था को ऊपर उठा सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक सरकार के उपायों से निवेश के माहौल में सुधार आएगा। साथ ही यह अर्थव्यवस्था ग्लोबल बाजार में निचले स्तर पर चल रहे कमोटिडी के भावों का लाभ उठाने की स्थिति में ला सकते हैं। इससे निवेश के लिए सही मुकाम तलाश रही विदेशी पूंजी का रुख भारत की ओर हो सकता है।
मूडीज ने दूसरे देशों के अपने अनुभव और पिछले एक दशक में भारत के प्रदर्शन के आधार पर उम्मीद जताई है कि सरकार के आर्थिक सुधार देश की उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ बचत और निवेश में भी तेजी ला सकते हैं। मूडीज के मुताबिक यदि सरकार की नीतियां वित्तीय घाटे को कम करने, महंगाई को स्थिर रखने और बैंकिंग सेक्टर में मजबूती लाने में कारगर होती हैं, तो बीते तीन वर्षों के दौरान देश की अर्थव्यवस्था की गति को प्रभावित करने वाले आर्थिक और वित्तीय जोखिमों को कम करने में सरकार को सफलता मिल सकती है।
नीतिगत स्तर पर किए जाने वाले यह बदलाव निवेश को ऊंचे स्तर पर ले जाकर और आर्थिक असंतुलन को सुधार कर अगले पांच से दस वर्षों तक देश की आर्थिक विकास दर को 7.5 फीसदी के दायरे में ले जाकर इसी स्तर पर बनाए रख सकते हैं।