भले ही बैंकर्स और बाजार को महंगाई कम होती दिख रही है, पर अभी आरबीआई के लिए यह चिंता का विषय बनी हुई है। ऐसे में आरबीआई के लिए मंगलवार को पेश होने वाली मौद्रिक नीति में कर्ज सस्ता करना आसान नहीं होगा। हालांकि अर्थशास्त्री अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए और महंगाई दर के सात फीसदी तक के स्तर पर पहुंचने से आरबीआई से रेपो रेट में कम से कम 0.25 फीसदी की कमी करने की पूरी उम्मीद कर रहे हैं।
बैंकर्स के अनुसार दिसंबर में जब महंगाई दर पिछले तीन साल में सबसे कम दर 7 फीसदी पर है, तो रेपो रेट में कमी की संभावना बढ़ गई है। इसके अलावा पिछले तीन-चार महीनों में सरकार द्वारा किए गए आर्थिक फैसलों से भी सकारात्मक संकेत मिले हैं।
यदि आरबीआई ऐसा करता है, तो पिछले 9 महीने में पहली बार प्रमुख दरों में कमी आएगी। एंजेल ब्रोकिंग फर्म के वाइस प्रेसिडेंट वैभव अग्रवाल ने अमर उजाला को बताया कि महंगाई दर में आई कमी और आरबीआई के पिछले रुख को देखते हुए वह रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कमी कर सकता है। इसके अलावा, बाजार में नकदी बढ़ाने के लिए वह सीआरआर में भी 0.25 फीसदी की कमी कर सकता है।
वहीं, सोमवार को आरबीआई आर्थिक विकास की समीक्षा में चालू वित्तीय वर्ष के लिए विकास दर के अनुमान में कमी कर दी है। आरबीआई ने 2012-13 के लिए विकास दर 5.7 फीसदी के अनुमान से घटाकर 5.5 फीसदी कर दिया है। साथ ही आरबीआई ने महंगाई दर को अभी भी सामान्य से ज्यादा बताया है।
उसके अनुसार थोक मूल्य सूचकांक चालू वित्तीय वर्ष में 7.5 फीसदी रहने का अनुमान है। आरबीआई ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के दो अंकों में पहुंचने की भी चिंता जताई है। जिसकी वजह से उसे मांग बढ़ने पर थोक मूल्य सूचकांक में तेजी होने की आशंका है।
इंडिया इंफोलाइन लिमिटेड (आईआईएफएल) के रिसर्च प्रमुख अमर अंबानी के अनुसार हम आरबीआई से रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कमी करने की उम्मीद कर रहे हैं। यहीं नहीं, वह साल 2013 में कुल एक फीसदी तक की कमी हो सकती है। रेपो रेट में कमी की संभावना को देखते हुए बांड बाजार में भी सरकारी बांड पर यील्ड 8.0 फीसदी से कम होकर 7.865 फीसदी पर आ गई है।