प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेपाल यात्रा से व्यापक उम्मीदों के बीच उद्योग संगठन फिक्की ने संभावना जताई है कि प्रधानमंत्री की इस यात्रा से भारत-नेपाल के बहुमुखी संबंधों को नई दिशा मिलेगी। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय कारोबार और निवेश बढ़ाने के लिए प्रभावकारी कदम उठाए जाने की भी उम्मीद है।
फिक्की की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट एवं ललित ग्रुप की सीएमडी डॉ. ज्योत्सना सूरी का कहना है कि भारत-नेपाल संबंधों को लेकर व्यापार एवं निवेश, संस्कृति और दोनों देशों के लोगों के बीच परस्पर संवाद की एक मजबूत तस्वीर उभरने की उम्मीद जगी है। भारत में 60 लाख नेपाली लोग काम करते हैं और छह लाख भारतीयों ने नेपाल को अपना घर बनाया है। यह हमारे मजबूत रिश्तों का प्रमाण है। पनबिजली, पर्यटन, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में अप्रयुक्त क्षमताओं का विस्तार कर दोनों देशों के बीच संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने की जरूरत है। इससे दोनों देशों का परस्पर आर्थिक एवं सामाजिक विकास होगा।
अनाधिकृत व्यापार को नियंत्रित करने के लिए भारत-नेपाल के बीच समझौता, द्विपक्षीय निवेश संरक्षण एवं संवर्धन समझौते (बीआईपीपीए) पर दस्तखत, दोहरा कराधान बचाव समझौता, संशोधित द्विपक्षीय हवाई सेवा समझौता और भारत के एक्जिम बैंक से नेपाल सरकार को कर्ज की सुविधा ने दोनों देशों के परस्पर संबंधों को मजबूत बनाया है।
प्रधानमंत्री मोदी की नेपाल यात्रा के दौरान दोनों देशों की नजर भारत-नेपाल पावर व्यापार समझौते को अंतिम स्वरूप देने और जल्द ही इसके मूर्त रूप लेने पर लगी हुई है। नेपाल अंतर-क्षेत्रीय संपर्क, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, जल-विद्युत, इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मा और मानव संसाधन विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग को इच्छुक है।
भारतीय उद्योगों ने भी पर्यटन और पनबिजली क्षेत्र को भारत-नेपाल सहयोग के कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया है। नेपाल में जाने वाले पर्यटकों में 20 फीसदी भारत से होते हैं और करीब 40 फीसदी पर्यटक भारत के जरिए नेपाल जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन गंतव्य के रूप में भारत और नेपाल दोनों देशों की एकसाथ मार्केटिंग से दोनों को फायदा होगा। भारतीय उद्योग जगत पनबिजली के क्षेत्रों समझौते को दोनों देशों के लिए लाभदायक सहयोग के रूप में देख रहा है। फिक्की अपने नेपाली समकक्ष के साथ इसे वास्तविकता के धरातल पर लाने के लिए इच्छुक भी है।