नरेंद्र मोदी सरकार ने नई गैस कीमतों को तीन महीने तक टालने का जो कदम उठाया है, उसके पीछे विधि और न्याय मंत्रालय की उस मजबूत राय का हाथ था, जिसमें कहा गया था कि यह मामला अभी अदालत के विचाराधीन है और फैसला रंगराजन फॉर्मूले के खिलाफ भी जा सकता है।
इस फॉर्मूले के मुताबिक सरकार को प्राकृतिक गैस की कीमत 4.2 डॉलर से बढ़ा कर 8 या 8.4 डॉलर एमबीटीयू करना है। सरकार के अंदरखाने यह बात चल रही है कि सरकार और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड को इस मामले में एक साथ नहीं दिखना चाहिए। क्योंकि इस मामले में किसी की जीत पक्की नहीं है।
दोनों के जीतने की संभावना आधी-आधी है। सरकार को यह सलाह दी गई थी कि वह उत्पादक कंपनियों के लिए गैस की नई कीमतें तय करने में जल्दबाजी न दिखाए। वह अदालत के फैसले का इंतजार करे और इस बीच कीमत तय करने का कोई ऐसा तरीका तैयार कर ले जो काफी हद तक आम आदमी के पक्ष में झुका हुआ हो।
रिलायंस के फैसले ने सरकार को किया नाराज
सरकार के एक आला अफसर ने कहा, इस मामले के कई कानूनी पहलू हैं। मसलन कीमत तय करने के लिए बने रंगराजन फॉर्मूले में जापानी कीमतों को ज्यादा तवज्जो दी गई है। जानकारों के मुताबिक यह मामले का कमजोर पहलू है।
नई गैस कीमतें तय करने में यूपीए सरकार के गैर पारदर्शी तौर-तरीके और तेल और गैस सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देने के नाम पर जल्दबाजी में इसे अधिसूचित करने का कदम भी अदालत के सामने टिकने वाला नहीं है।
कहा जा रहा है कि मोदी सरकार ने पर्दे के पीछे की कवायद के तहत रिलायंस उसकी सहयोगी कंपनी ब्रिटिश पेट्रोलियम और निको रिसोर्सेज के पास अपने दूत भेज कर यह कहा था कि वे उसके खिलाफ आर्बिट्रेशन की प्रक्रिया वापस ले ले ताकि नई गैस कीमतें तय करने का रास्ता साफ हो सके और इससे जुड़े सभी पक्षों को वाजिब हक मिले।
लेकिन रिलायंस और उसकी सहयोगी कंपनियां टस से मस नहीं हुईं और उनके इस रुख ने सरकार को नाराज कर दिया। अब वह अदालत के फैसले के बाद ही कीमतें तय करने पर विचार करेगी।
पुराने दामों पर ही कंपनियों को गैस बेचने का आदेश
पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि सरकार गैस की नई कीमतों पर अनिश्चितता खत्म करने के लिए बीच का रास्ता तलाशना चाहती है।
लेकिन वे यह भी कह रहे हैं कि यूपीए सरकार के उलट सरकार देश के सभी स्त्रोतों से हासिल गैस के लिए एक कीमत तय नहीं करेगी। एक आला अधिकारी ने कहा, ‘‘ सरकार इस मामले से जुड़े सभी पक्षों से बातचीत कर रही है और एक-दो दिन में कोई स्पष्ट हल निकल आने की पूरी संभावना है।
कोई ऐसा फॉर्मूला निकाला जाएगा जो सभी पक्षों को मंजूर हो और उपभोक्ताओं को भी नुकसान न पहुंचाए। हालांकि इस अधिकारी का यह भी कहना था कि सरकार रंगराजन फॉर्मूले को भी सिरे से खारिज नहीं कर सकती।
सरकार के लिए सबसे अच्छा विकल्प रंगराजन फार्मूले में बदलाव करने और कुछ संशोधनों के साथ इसे लागू करने का है। दरअसल रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड को हद में रखने के लिए सरकार ने सभी गैस उत्पादक कंपनियों से कहा है कि वे नए फैसले तक 4.2 डॉलर प्रति एमबीटीयू की दर से ही गैस बेचें।
मामले का कमजोर पहलू
कीमत तय करने के लिए बने रंगराजन फॉर्मूले में जापानी कीमतों को ज्यादा तवज्जो दी गई है। जानकारों के मुताबिक यह मामले का कमजोर पहलू है।
नई गैस कीमतें तय करने में यूपीए सरकार के गैर पारदर्शी तौर-तरीके और तेल और गैस सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देने के नाम पर जल्दबाजी में इसे अधिसूचित करने का कदम भी अदालत के सामने टिकने वाला नहीं है।
सरकार का विकल्प
सरकार रंगराजन फॉर्मूले को भी सिरे से खारिज नहीं कर सकती। सरकार के लिए सबसे अच्छा विकल्प रंगराजन फार्मूले में बदलाव करने और कुछ संशोधनों के साथ इसे लागू करने का है।