कभी रिंगटोन डाउनलोड करने के नाम पर तो कभी मनपसंद गाने की डायलर टोन लगाने को लेकर मोबाइल कंपनियां उपभोक्ताओं पर जबरन बोझ डाल रही हैं। पोस्टपेड कनेक्शन धारक ही नहीं बल्कि प्रीपेड धारक भी मोबाइल कंपनियों की इस धींगामुश्ती से परेशान हैं। अवधि समाप्त होने के बाद भी कंपनियां डायलर टोन को हटाने का मैसेज देने के बाद भी सेवा देती रहती हैं।
बीएसएनएल उपभोक्ताओं का कहना है कि रिंगटोन डायल करने के नाम पर चूना लगाया जा रहा है। मोबाइल पर आफर देने के बाद बगैर उपभोक्ताओं की मर्जी के डायलर टोन बदल दी जाती है। एक माह का चार्ज वसूलने के बाद भी उसे हटाया नहीं जाता है।
इसी तरह कभी क्रिकेट का स्कोर जानने को तो कभी किसी सेवा की जानकारी के लिए कॉल करने पर पैसा काट दिया जाता है। कंपनी के टोल फ्री नंबर पर संपर्क करने के लिए घंटों जद्दोजहद करनी पड़ती है। इसके बाद भी सेवाएं डिएक्टिवेट नहीं की जाती हैं।
मोबाइल कंपनियों की इस मनमानी से उपभोक्ता परेशान हैं। ऐसा नहीं है कि यह खेल केवल बीएसएनएल में चल रहा है। एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया, टाटा डोकोमो और यूनिनॉर के उपभोक्ता भी इसी तरह की दिक्कतों का सामना कर रहे हैं।
गृहणी रेनू का कहना है कि गलती से मोबाइल में इंटरनेट सेवा शुरू हो गई। इसे बंद करने की कोशिश की गई, लेकिन तब तक काफी पैसे कट चुके थे।