ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर ताजमहल के आसपास पर्यावरण ठीक रहे, इसके लिए सरकार सस्ती दरों पर गैस की आपूर्ति करती है, लेकिन इससे फायदे के बजाय नुकसान हो रहा है। उस इलाके में उद्यमियों ने सस्ती गैस का दुरुपयोग करना शुरू कर दिया है। इससे पर्यावरण को नुकसान तो हो ही रहा है, सरकारी खजाने को चूना भी लग रहा है। इसके अलावा दूसरे इलाके के उद्योगपतियों की इस वजह से प्रतिस्पर्धी क्षमता प्रभावित हो रही है, जिससे निर्यात गिर रहा है। यह दावा है नार्थ इंडिया ग्लास मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (निगमा) का।
निगमा के अध्यक्ष केके शर्मा ने अमर उजाला के साथ विशेष बातचीत में बताया कि ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में पेट्रोलियम मंत्रालय उद्यमियों को 16 रुपये प्रति एससीएम की दर से गैस उपलब्ध कराती है, जबकि दूसरे इलाकों में गैस की कीमत 42 रुपये एससीएम है। वहां पिछले 12 वर्षों के दौरान सस्ती गैस की लालच में 23 नए कंटेनर ग्लास कारखाने अवैध रूप से बन गए। इनमें से 15 कारखाने तो फिरोजाबाद में हैं। उन कारखानों में पहले शीशे के छोटे मोटे सामान बनते थे। आज यह क्षमता में विस्तार कर शराब की बोतलें एवं अन्य चीजें बना रहे हैं।
टीटीजेड के उद्योगपतियों को सस्ती दरों पर गैस मिल रही है, जबकि इससे बाहर के उद्योगपतियों को महंगी दरों पर गैस मिलती है। इसके चलते उत्पादन लागत अधिक पड़ने के कारण वह प्रतिस्पर्धा से बाहर होते जा रहे हैं। शर्मा का कहना है कि कंटेनर ग्लास कारखानों की वजह से ताजमहल के आसपास पर्यावरण बिगड़ रहा है, लेकिन सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है।
निगमा की बातों का समर्थन केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय भी करता है। वाणिज्य सचिव राजीव खेर 19 अगस्त 2014 को पेट्रोलियम मंत्रालय को लिखे पत्र में इस अनियमितता की बात उठा चुके हैं। खेर का कहना है कि टीटीजेड में सस्ती गैस मिलने की वजह से उस इलाके के बाहर के शीशा कारखानों पर बेहद बुरा असर पड़ा है, जिस वजह से देश का निर्यात प्रभावित हो रहा है। उनके मुताबिक टीटीजेड के बाहर के उद्योगों को साल में करीब 2,095 करोड़ रुपये (34 करोड़ डॉलर) का कारोबारी नुकसान हो रहा है।
टीटीजेड में दी जा रही सस्ती गैस के दुरुपयोग की बात पहली बार नहीं उठी है। इससे पहले पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने भी जिक्र किया है कि सस्ती गैस की नीति से ताज महल के आसपास के क्षेत्र का पर्यावरण बिगड़ रहा है। इसके अलावा संसद की स्थायी कमेटी ने भी अक्तूबर 2013 में कहा था कि यह व्यवस्था ठीक नहीं है। इसे खत्म कर ऐसी व्यवस्था की जाए, तो टीटीजेड के अलावा अन्य क्षेत्र के शीशा कारोबारियों का भला हो। वाणिज्य सचिव राजीव खेर ने पेट्रोलियम सचिव से अनुरोध किया है कि इस मामले में पड़ताल कर शीघ्र ही ऐसी व्यवस्था करें, जिससे टीटीजेड से बाहर के शीशा कारखानों की मुश्किलें दूर हो सकें।