म्यूचुअल फंड इडस्ट्री को आशंका है कि बजट के कुछ प्रस्तावों के कारण निवेशक 1.5 लाख करोड़ रुपया निकाल सकते हैं। इंडस्ट्री के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था एएमएफआई ने बाजार नियमाक सेबी से सरकार के समक्ष यह मामला उठाने को कहा है।
सेबी को लिखे पत्र में एसोसिएशन फॉर म्यूचुअल फंड इन इंडिया (एएमएफआई) ने यह भी सुनिश्चित करने की मांग की है कि केंद्रीय बजट में लाए गए कर प्रस्तावों को पीछे के समय से न लागू किया जाए। इसके अलावा सेबी से डेट ओरिएंटेड एमएफ स्कीमों पर लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स अगले वित्तीय वर्ष तक के लिए टालने को भी कहा है।
पत्र में फंड हाउसों ने नए नियमों को क्लोज एंडेड डेट स्कीमों तक ही सीमित करने की अपील की है। सेबी को यह पत्र सोमवार को भेजा गया है। इससे पहले शुक्रवार को म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों ने सेबी चेयरमैन यूके सिन्हा से मुलाकात की थी।
10 मई को अपने बजट प्रस्ताव में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि डेट ओरिएंटेड म्यूचुअल फंडों पर लंबी अवधि का केपिटल गेन टैक्स 10 फीसदी से बढ़ा कर 20 फीसदी किया जाएगा। इसके अलावा बजट में डेट म्यूचुअल फंडो लंबी अवधि की परिभाषा को बदल कर 36 माह के बजाए 12 माह किया जाएगा।
इन मुद्दों पर बाजार नियामक के हस्तक्षेप की मांग करने के साथ एमएफआई ने यह मामला वित्त मंत्रालय के समक्ष भी उठाया है। एएमएफआई का कहना है कि क्लोज्ड एंडेड डेट स्कीमों पर लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगने और ओपेन एंडेड डेट स्कीमों, गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों पर लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स न लगने से यह स्कीम निवेश के लिए आकर्षक नहीं रह जाएगी। इससे कॉरपोरेट बांडों की तरलता और विकास प्रभावित हो सकता है।