आम बजट में एक्साइज ड्यूटी के पांच फीसदी से छह फीसदी करने के फैसले से दवाइयों के दाम बढ़ने की संभावना काफी अधिक हो गई है। वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अपने आम बजट में बड़े पैमाने पर दवाइयां खरीदने पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने का फैसला किया था।
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने बजट की समीक्षा करने के बाद कहा, ‘बजट में एक्साइज ड्यूटी में जो वृद्धि की गई है, उससे दवाइयां बनाने वाली भारतीय कंपनियों को कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि वह इस बोझ को आम ग्राहकों के कंधों पर डाल देंगी।’
रियायती पांच प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी के दायरे में छह लाइफ-सेविंग दवाइयों को शामिल किया गया है और बड़े पैमाने पर दवाइयां बनाने वाली कंपनियां इनका उत्पादन करती हैं। हालांकि इंडस्ट्री पर इसका प्रभाव कम ही होगा क्योंकि भारतीय दवा बाजार में इसका उत्पादन बहुत ही कम पैमाने पर होता है।
क्रिसिल ने कहा कि बजट में अनुसंधान एवं विकास व्यय (आर एंड डी व्यय) में पांच साल में 200 फीसदी कमी करने की योजना है। मगर इससे भारतीय दवा उत्पादकों को कम ही फायदा होने वाला है क्योंकि कंपनियों का आर एंड डी व्यय उनकी नेट सेल का पांच फीसदी से भी कम है।
रेटिंग एजेंसी ने यह भी माना कि भारतीय दवा बाजार तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2013-14 में क्रिसिल रिसर्च को उम्मीद है कि घरेलू दवा इंडस्ट्री 13-14 फीसदी की अच्छी दर के साथ प्रगति करेगी और उनका सालाना टर्न ओवर 36-37 से बिलियन डॉलर रहेगा।