निजी साझेदारी के जरिए राजमार्गों के निर्माण की योजना को एक बड़ा झटका लग सकता है। इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की प्रमुख कंपनी जीएमआर किशनगढ़-उदयपुर-अहमदाबाद नेशनल हाईवे परियोजना से हाथ खींचने के लिए सरकार पर दबाव बना रही है। करीब 9 हजार करोड़ रुपये का यह ठेका जीएमआर को पिछले साल मिला था, लेकिन अब कंपनी इस समझौते को खत्म करना चाहती है। इसके लिए कंपनी ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को एक नोटिस भेजा है, जिसमें पर्यावरण मंजूरी मिलने देरी और एनएचएआई की भूमिका को मुद्दा बनाया गया है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री सीपी जोशी ने इस बारे में जानकारी नहीं होने की बात कहकर प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है, जबकि एनएचएआई के अधिकारियों ने गत सोमवार को जीएमआर का नोटिस मिलने की बात स्वीकार की है। जीएमआर सूत्रों के अनुसार, परियोजना से हाथ खींचने के लिए कंपनी ने पर्यावरण मंजूरी नहीं मिलने और एनएचएआई से पूरी मदद न मिल पाने को वजह बताया है।
इस नोटिस का जवाब एचएचएआई को 4 जनवरी तक देना है। जीएमआर के दबाव के बाद एनएचएआई के अलावा योजना आयोग और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय भी हरकत में आ गया है। एनएचएआई अधिकारियों का कहना है कि परियोजना के लिए पर्यावरण मंजूरी की सिफारिश गत जून में हो चुकी है लेकिन वन संबंधी मंजूरी मिलनी अभी बाकी है।
योजना आयोग ने भी सक्रियता दिखाते हुए इस मामले को सुलझा लिए जाने का भरोसा जताया है। मालदीव सरकार द्वारा एयरपोर्ट निर्माण का ठेका जीएमआर से वापस लेने के बाद जीएमआर बाकी परियोजनाओं पर भी फूंक-फूंक कर कदम बढ़ा रही है। एनएचएआई की ओर से टोल की दरें अधिसूचित करने में हो रही देरी को भी जीएमआर की नाराजगी की वजह माना जा रहा है। राजस्थान में किशनगढ़ से उदयपुर होते हुए अहमदाबाद को जोड़ने वाले 555 किलोमीटर के इस चार लेन नेशनल हाईवे को छह लेन करने की योजना है। वर्ष 2011 के दौरान निजी क्षेत्र को दी गई सड़क परियोजनाओं में यह सबसे अहम परियोजना है।