सिंगल बांड रिटेल में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की इजाजत के बाद आइकिया और पेवर्स के समेत कई अन्य वैश्विक रिटेल कंपनियां भारत में आने की तैयारी कर रही हैं। सेलियो, ग्रुपो कॉइन और आट्र्साना जैसी करीब आधा दर्जन कंपनियां एकल ब्रांड रिटेल क्षेत्र में आवेदन करने की तैयारी कर रही हैं।
उम्मीद है कि ये कंपनियां अगले कुछ हफ्तों में सरकार से संपर्क कर रही हैं। सूत्रों का कहना है कि ये कंपनियां या तो भारत में मौजूद अपने उद्यम में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश कर सकती हैं या फिर 100 फीसदी स्वामित्व के साथ खुद का स्टोर खोल सकती हैं। उन्होंने कहा कि एचऐंडएम, मैंगो और टॉमी हिलफिगर भी इस दिशा में आगे बढ़ सकती है।
सरकार ने एकल ब्रांड रिटेल में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को इस साल जनवरी में अधिसूचित किया था। इसके बावजूद गिनी-चुनी कंपनियों ने ही सरकार के पास निवेश के लिए आवेदन किया था। ब्रिटेन की जूता कंपनी पेवर्स ने देश में 2 करोड़ डॉलर निवेश का प्रस्ताव दिया था वहीं स्वीडन की फर्नीचर कंपनी आइकिया ने 1.5 अरब यूरो के निवेश का प्रस्ताव दिया था।
ज़ारा होल्डिंग ने मासिमो दुत्ती स्टोर खोलने का आवेदन किया था लेकिन विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड ने इसे खारिज कर दिया था, क्योंकि ब्रांड और आवेदक कंपनी अलग-अलग इकाई थीं। माना जा रहा है कि फ्रांसीसी कंपनी सेलियो और इटली की ग्रुपो कॉइन अगले कुछ हफ्तों में औद्योगिक नीति एवं सवद्र्घन विभाग के पास अपने मौजूदा संयुक्त उद्यम में बहुलांश हिस्सेदारी के लिए आवेदन कर सकती है।
सेलियो का फ्यूचर समूह के साथ 50-50 फीसदी का संयुक्त उद्यम है। इसी तरह ग्रुपो की सहायक इकाई ओवेसी एसपीए की ब्रांडहाउस रिटेल्स में 37.5 फीसदी हिस्सेदारी है। इस बारे में जानकारी के सेलियो और ग्रुपो को ईमेल किया गया लेकिन उनका जवाब नहीं आया। हालांकि फ्यूचर समूह के एक अधिकारी ने कहा कि सेलियो संयुक्त उद्यम में हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है। ब्रांडहाउस रिटेल्स के प्रवक्ता ने इस बारे में कुछ भी कहने से मना कर दिया।