शीर्ष बैंकर उदय कोटक ने कहा है कि सोने जैसी निष्क्रिय पड़ी रहने वाली संपत्ति से निवेशकों का ध्यान हटाने के लिए नीति निर्माताओं को शेयर बाजार को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए। साथ ही भारतीय बचत का रुख देश के शेयर बाजारों की ओर मोड़ना होगा।
निजी क्षेत्र के कोटक महिंद्रा बैक के प्रमुख उदय कोटक ने कहा कि मौजूदा स्तर से इस साल भारतीय शेयर बाजारों से 15-20 फीसदी रिटर्न की उम्मीद की जा सकती है। इस ग्रोथ से निवेशकों का ध्यान सोने से हटाकर निवेश के एक विकल्प के रूप में शेयर बाजार की ओर खींचने में मदद मिलेगी।
विश्व आर्थिक मंच (डब्लूईएफ) के दौरान अलग से एक साक्षात्कार के दौरान कोटक ने कहा कि अब समय आ गया है कि भारतीय बचत को शेयर बाजार की ओर आकर्षित किया जाए और इसके लिए नीति निर्माताओं को उपाय करने होंगे। डब्लूईएफ की बैठक में नियमित तौर पर शामिल होने वाले कोटक ने पिछले साल दावोस में कहा था कि सोने की मांग विशेषकर इसके आयात पर अंकुश लगाने के लिए आपात कदम उठाने जाने की जरूरत है।
सोने के आयात को हतोत्साहित करने के लिए हाल में सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के बारे में उन्होंने कहा कि सोने के आयात में कमी लाने और भारतीयों का सोने से मोह भंग करने के लिए दो उपाय किए जा सकते हैं। पहला कदम, आयात शुल्क बढ़ाकर, जबकि दूसरा उपाय अन्य एसेट वर्ग को और आकर्षित बनाकर।
यदि शेयर में निवेश भारतीय बचतकर्ताओं के लिए और आकर्षित हो जाता है, तो सोने की मांग अपने आप घट जाएगी। उन्होंने कहा कि आज हम देख रहे हैं कि विदेशी बचतकर्ता भारतीय शेयर बाजारों में निवेश कर रहे हैं। यानी, एक तरह से हम अपने शेयर बाजारों में विदेशी बचत का आयात कर रहे हैं और ठीक उसी समय हम विदेशी सोने में भारतीय बचत का निर्यात कर रहे हैं।
कोटक ने कहा कि भारी आयात शुल्क में बढ़ोतरी के साथ अन्य कदम भी उठाने होंगे। सबसे महत्वपूर्ण यह कि भारतीय निवेशकों को सोने से दूर रखने के लिए एक आकर्षक निवेश विकल्प उपलब्ध कराना होगा।
भारत से निवेशकों को बहुत अधिक उम्मीद
हाल के वर्षों में सरकार द्वारा उठाए गए आर्थिक सुधार के कदमों पर खासा जोर देते हुए शहरी विकास मंत्री कमल नाथ ने कहा है कि निवेशकों की उम्मीदें बहुत अधिक हैं। इसके चलते निवेश की उनकी गतिविधियां बहुत सुस्त हैं।
दावोस में भारतीय शिष्टमंडल का नेतृत्व कर रहे कमल नाथ ने कहा कि भारत में आर्थिक सुधार को लेकर जितने उपाय हुए हैं, उतने अमेरिका और यूरोप ने नहीं देखे होंगे। पिछले कुछ वर्षों में भारत में बड़ी संख्या में आर्थिक सुधार के कदम उठाए गए हैं। यह अन्य दूसरे देशों के मुकाबले कहीं अधिक हैं। भारत की तरह उदार नीतियां अन्य किसी दूसरे देशों में नहीं हैं।