गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए जारी होने वाली नई गाइडलाइन में कई सारे बदलाव की संभावना है। इसके तहत कंपनियों के लिए गैर निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) के नियमों के मानक कड़े हो सकते हैं, वहीं कंपनियों को टियर-1 कैपिटल के तहत ज्यादा पूंजी रखनी पड़ सकती है। हालांकि, कंपनियों को प्राथमिकता क्षेत्र के तहत दिए जाने वाले कर्ज पर थोड़ी राहत मिल सकती है।
सूत्रों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक जल्द ही गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए नई गाइडलाइन जारी करने जा रहा है। इसके तहत कंपनियों को टियर-1 कैपिटल के तहत 7.5 फीसदी की जगह 10 फीसदी तक पूंजी रखने का प्रावधान किया जा सकता है। रिजर्व बैंक कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले कर्ज के एनपीए नियमों में भी बदलाव करने की तैयारी में हैं।
अभी एनबीएफसी के ऐसे ग्राहक जिन्होंने 180 दिन तक लगातार कर्ज की किस्त नहीं चुकाई है, उनके कर्ज एनपीए हो जाते हैं। आरबीआई इस अवधि को घटाकर बैंकों के समान 90 दिन करने पर विचार कर रहा है। हालांकि यह सीमा आरबीआई एक बार में न घटाकर धीरे-धीरे कम कर सकता है। यानी, पहले यह सीमा 180 दिन की जगह 120 दिन की जा सकती है।
अधिकारी के अनुसार, इसी तरह रिजर्व बैंक ने पिछले साल एनबीएफसी द्वारा दिए गए कर्ज को प्राथमिकता क्षेत्र से बाहर कर दिया था। इसके बाद प्राथमिकता क्षेत्र के लिए गठित नॉयर समिति ने जो सिफारिशें दी हैं, उसके आधार पर एनबीएफसी को हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के समान वर्ग में रखकर प्राथमिकता क्षेत्र के तहत दोबारा शामिल किया जा सकता है।
गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए गठित उषा थोराट समिति ने कंपनियों के लिए टियर-1 कैपिटल, एनपीए सहित प्रमुख नियमों में बदलाव की सिफारिश की थी। जिसके बाद आरबीआई ने अक्तूबर में पेश की गई मौद्रिक नीति में नई गाइडलाइन जारी करने की बात कही है।