डीजल के दाम बढ़ाने के प्रस्ताव पर फैसले में हो रही देरी से तेल कंपनियों की हालत पतली होती जा रही है। ईंधन बिक्री पर तेल कंपनियों के कुल नुकसान में डीजल की भागीदारी करीब 60 फीसदी तक पहुंच गई है। नुकसान के बढ़ते आंकड़ों के मद्देनजर तेल कंपनियों ने पेट्रोलियम मंत्रालय से डीजल के दाम बढ़ाने का निर्णय यथाशीघ्र करने की गुहार लगाई है। यह भी कहा गया है कि यदि निर्णय लेने में देरी होती है, तो उनके घाटे की भरपाई जल्द करने पर विचार किया जाए।
मंत्रालय के एक आला अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि चालू वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में डीजल बिक्री पर अंडर रिकवरी 52,711 करोड़ रुपये की थी, जो कि अब बढ़कर करीब 75 हजार करोड़ रुपये हो चुकी है। जबकि सरकारी तेल कंपनियों की कुल अंडर रिकवरी इस दौरान (अप्रैल-दिसंबर 2013) 1,25,000 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।
हालांकि इस भारी भरकम नुकसान की भरपाई के लिए अब तक 30,000 करोड़ रुपये सरकार की ओर से तेल कंपनियों को दिए जा चुके हैं। जबकि अपस्ट्रीम तेल कंपनियों ने 45 हजार करोड़ रुपये घाटे का बोझ उठाया है। महत्वपूर्ण यह है कि शेष 50 हजार करोड़ रुपये की भरपाई सरकार को करना है। लेकिन अभी तक इसका कोई प्रावधान पेश नहीं किया गया है। यही वजह है कि तेल कंपनियां सरकारी नियंत्रण वाले ईंधन के दाम जल्द बढ़ाने की गुहार लगा रही है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, डीजल बिक्री पर तेल कंपनियों की कुल अंडर रिकवरी 2011-12 में 81,192 करोड़ रुपये और इससे पहले 34,706 करोड़ रुपये रही थी। मौजूदा वित्तीय वर्ष के नौ माह में ही डीजल घाटा करीब 75 हजार करोड़ रुपये हो चुका है।