बजट को समझने और समझाने में पेचीदगियां तो हैं पर इन्हें समझा और समझाया जा सकता है। बजट लैटिन के बोजते शब्द से बना है जिसका मतलब है चमड़े का थैला। माना जाता है कि मध्यकाल में पश्चिमी देशों के व्यापारी पैसै रखने के लिए चमड़े के थैले का प्रयोग करते थे। यह परंपरा राजकाज और प्रशासनिक गलियारे तक पहुंची जहां चमड़े के बैग में ही आय-व्यय का हिसाब किताब रखा जाने लगा। आधुनिक काल में यह शब्द सरकारी आमदनी और खर्चों के हिसाब का प्रतीक बन गया।
बजट आकलन
वित्तमंत्री संसद में बजट प्रस्ताव रखते हुए विभिन्न तरह के कर और शुल्क के माध्यम से होने वाली आमदनी और योजनाओं तथा अन्य तरह के खर्चों का जो लेखा पेश करते हैं उन्हें ही बजट आकलन कहना उचित होगा।
वित्त विधेयक
इस विधेयक के माध्यम से ही आम बजट पेश करते हुए वित्तमंत्री सरकारी आमदनी बढ़ाने के ख्याल से नए करों आदि का प्रस्ताव करते हैं। इसके साथ ही वित्त विधेयक में मौजूदा कर प्रणाली में किसी तरह का संशोधन आदि को प्रस्तावित किया जाता है। संसद की मंजूरी मिलने के बाद ही इसे लागू किया जाता है।
वित्तीय घाटा
भारतीय बजट की त्रासदी है कि सरकारी खर्च आमदनी से ज्यादा होता है। खर्च और आमदनी के इसी अंतर को वित्तीय घाटा या बजटीय घाटा कहा जाता है।
प्राथमिक घाटा
वित्तीय घाटे में से ब्याज के तौर पर अदा की गई रकम को घटा कर जो रकम बचती है उसे प्राथमिक घाटा कहा जाता है।
राजस्व सरप्लस
यदि राजस्व प्राप्तियां राजस्व खर्च से अधिक है तो यह अंतर राजस्व सरप्लस की श्रेणी में होगा।
विनियोग विधेयक
वित्तमंत्री बजट पेश क रते हुए यह विधेयक पेश करते हैं, जिसका सीधा सा अर्थ ये है कि तमाम तरह के उपायों के बावजूद सरकारी खर्चें पूरे करने के लिए सरकारी आमदनी नाकाफी है और सरकार को इस मद के खर्चें पूरे करने के लिए संचित निधि से धन की जरूरत है। एक तरह से वित्तमंत्री इस विधेयक के माध्यम से संसद से संचित निधि से धन निकालने की अनुमति मांगते हैं।
पूंजी बजट
बजट पेश करते हुए वित्तमंत्री सरकारी आमदनी का ब्यौरा पेश करते हैं उनमें पूंजीगत आय भी शामिल होती है। यानी इसमें सरकार द्वारा रिजर्व बैंक और विदेशी बैंक से लिए जाने वाले कर्ज, ट्रेजरी चालानों की बिक्री से होने वाली आय के साथ ही पूर्व में राज्यों को दिए गए कर्जों की वसूली से आए धन का हिसाब कि ताब भी इस पूंजी बजट का हिस्सा है।
संशोधित आकलन
यह बजट में खर्चों के पूर्वानुमान और वास्तविक खर्चों के अंतर का ब्यौरा है।
सब्सिडी
केंद्र सरकार व्यक्ति अथवा व्यक्तियों के समूह को प्रतिस्पर्धी बनाने के ख्याल से राज सहायता देती है। यह लोगों को अपने जीवन स्तर को उठाने के लिए एक अवसर देने के ख्याल से भी प्रेरित है। जैसे सरकार रसोई गैस के उपयोग को बढ़ाने और पर्यावरण की संरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसकी खरीद पर सब्सिडी देती है।
पूंजीगत सामान
बजट में कई बार पूंजीगत सामान की चर्चा आती है। किसी भी उत्पाद के उत्पादन में काम आने वाली वस्तु को पूंजीगत सामान अथवा उत्पाद कहा जाता है।
पूंजी भुगतान
सरकार को किसी तरह की परिसंपत्ति खरीदने के लिए जो भुगतान देना होता है वह इस श्रेणी में आता है। केंद्र सरकार द्वारा राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और सार्वजनिक उपक्रमों को मंजूर ऋण और अग्रिम राशि भी पूंजी खर्च के रूप में जाना जाता है।
पूंजी प्राप्तियां
रिजर्व बैंक अथवा अन्य एजेंसियों से प्राप्त कर्ज, ट्रेजरी चालान की बिक्री से होने वाली आमदनी के साथ ही राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों को दिए गए पिछले ऋणों की उगाही और सार्वजनिक उप्रक्रमों में अपनी हिस्सेदारी बेचने से प्राप्त धन भी इसी श्रेणी में आते हैं।
चालू खाते का घाटा
यदि निर्यात की अपेक्षा ज्यादा आयात करना पड़ता है तो विदेशी मुद्रा का नुकसान होता है। ऐसी परिस्थिति में यह घाटा चालू खाते के घाटे में दर्ज किया जाता है।
सीमा शुल्क
देश की सरहद को पार करने वाली हर वस्तु के ऊपर कुछ शुल्क तय होते हैं। यानी देश से निर्यात होने अथवा आयात होने वाली वस्तु के ऊपर जो शुल्क देय होता है वह सीमा शुल्क यानी कस्टम ड्यूटी के रूप में जाना जाता है। आयातकों और निर्यातकों दोनों से ही इस तरह का शुल्क लिया जाता है जो सरकार के लिए आमदनी का एक अच्छा जरिया है।
काउंटरवेलिंग ड्यूटी
मुख्य रूप से इसका मकसद अनर्गल आयात को हतोत्साहित करना है। अन्य देशों से आयात होने वाली वस्तुओं पर यह शुल्क लागू होता है।
कंसोलिडेटेड फंड
इसे संचित कोष के रूप में भी समझा जा सकता है। जहां सरकार की सारी आमदनी संचित होती है, जिनमें सभी तरह के राजस्व आय, ऋण और ऋण की वापसी आदि शामिल होती हैं।
सार्वजनिक खाता
इस खाते में वह राशि शामिल की जाती है जो कंसोलिडेटेड फंड से अलग है।
आपात कोष
जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है इस कोष का इस्तेमाल आपात परिस्थितियों में किया जाता है। इस कोष से खर्च के लिए राष्ट्रपति की अनुमति जरूरी होती है।
केंद्रीय योजना
केंद्र सरकार के बजटीय सहायता अथवा सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा आंतरिक अथवा अन्य बजटीय संसाधनों से संचालित योजनाओं को इस श्रेणी में रखा जाता है।
प्रत्यक्ष कर
जैसा कि नाम से ही जाहिर है कर दायरे में आने वाले लोगों और कं पनियों पर लागू कर को इसी श्रेणी में रखा गया है।
अप्रत्यक्ष कर
उत्पादित, आयातित, निर्यातित वस्तुओं पर सीमा शुल्क अथवा उत्पादन शुल्क के रूप में प्राप्त आय इस श्रेणी में आते हैं।
अनुदान मांग
संचित कोष से मांगे गए धन के खर्चों का अनुमानित लेखा जोखा ही अनुदान मांग है। उत्पाद शुल्क- किसी भी तरह के उत्पादन पर सरकार यह कर लगाती है। यानी देश में उत्पादित हर वस्तु पर यह शुल्क लागू है।
सकल घरेलू उत्पाद
देश में उत्पादित सभी तरह के उत्पाद की कीमत तथा सेवाओं से प्राप्त धन की कीमत ही सकल घरेलू उत्पाद है।
सकल राष्ट्रीय उत्पाद
सकल घरेलू उत्पाद के अलावा देश में रहने वाले लोगों द्वारा विदेशों में निवेश से अर्जित आय को भी इसमें जोड़ दिया जाता है। लेकिन साथ ही विदेशी मूल के लोगों द्वारा देश में अर्जित आय को इसमें से घटा दिया जाता है।
वैट
यह कर किसी उत्पाद और उसके निर्माण में प्रयुक्त उत्पाद की कीमत के अंतर के आधार पर तय होता है।
मोडवैट
मूल्यवर्धित कर का संशोधित रूप ही मोडवैट है। इसका मकसद किसी उत्पाद के निर्माता को राहत देना है जिनके आपूर्तिकर्ता पहले ही सीमा शुल्क अदा कर चुके हैं।
प्रदर्शन बजट
यह विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की गतिविधियों और कार्यक्रमों का लेखा जोखा है।
योजना खर्च
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सहायता के अलावा केंद्र सरकार की योजनाओं पर होने वाले सभी तरह के खर्चों को इसमें शामिल किया जाता है।
गैर योजना खर्च
इसमें ब्याज की अदायगी, रक्षा, सब्सिडी यानी राज सहायता, डाक घाटा, पुलिस, पेंशन, आर्थिक सेवाएं, सार्वजनिक उपक्रमों को दिए जाने वाले ऋण और राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और विदेशी सरकारों को दिए जाने वाले ऋण शामिल होते हैं।
राजस्व खर्च
यह सरकारी मंत्रालयों, विभागों और अन्य सेवाओं पर होने वाला खर्च है। इसमें सरकार द्वारा पिछले कर्जों की ब्याज अदायगी का खर्च भी शामिल होता है।