वित्त मंत्रालय ने नए आयकर कानून (डीटीसी) के तहत आयकर छूट की सीमा को बढ़ाकर 3 लाख रुपये करने की संसद की स्थायी समिति की सिफारिश को अस्वीकार कर दिया है। साथ ही समिति की सिफारिश के अनुरूप आयकर स्लैब में बदलाव को भी डीटीसी में शामिल करने मंत्रालय ने इनकार कर दिया है।
संसद की स्थाई समिति ने थी सिफारिश
पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री व भाजपा नेता यशवंत सिन्हा की अध्यक्षता वाली संसद की स्थाई समिति ने वित्त मंत्रालय से नए आयकर कानून में आयकर छूट की सीमा को मौजूदा दो लाख रुपये बढ़ा कर तीन लाख रुपये करने की सिफारिश की है।
इसके अलावा कमेटी ने आयकर स्लैब में बदलाव करते हुए 3 से 10 लाख रुपये की सालाना आय वालों पर 10 फीसदी आयकर, 10 से 20 लाख रुपये आय पर 20 फीसदी और 20 लाख रुपये से अधिक की सालाना आय वालों पर 30 फीसदी की दर से आयकर लगाने की सिफारिश की है।
60,000 करोड़ का होगा घाटा
वित्त मंत्रालय ने इन सिफारिशों को मानने से यह कहते हुए इनकार किया है कि इससे सरकार के कर आधार काफी घट जाएगा और सालाना 60 हजार करोड़ रुपये की राजस्व हानि होगी।
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि संसदीय समिति की यह सिफारिशों कर नीति से मेल नहीं खाती हैं। मंत्रालय ने बताया है कि कर संग्रह बढ़ाने के लिए डीटीसी में व्यक्तिगत आयकर दाताओं के लिए आयकर का चौथा स्लैब शामिल करने की बात शामिल की गई है।
इसके अलावा हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) और न्यायिक व्यक्ति(आर्टिफीशियल ज्यूडीशरी पर्सन) की आय 10 करोड़ से अधिक होने पर इनके ऊपर 35 फीसदी की दर से आयकर लगाने का प्रस्ताव भी नए कानून के ड्राफ्ट में शामिल किया जा रहा है।