सरकार ने बजट घोषणा के अनुरूप एक बार फिर से नए कलेवर में किसान विकास पत्र की बिक्री शुरू कर दी है। फिलहाल यह डाकघरों के जरिए मिलेगा लेकिन बाद में इसे बैंकों से भी बेचने की व्यवस्था की जाएगी। माना जा रहा है कि सरकार ने निवेश के लिए ज्यादा पूंजी जुटाने और लोगों को निवेश के रूप में सोने का विकल्प उपलब्ध कराने के मद्देनजर इसे रिलांच किया है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को यहां किसान विकास पत्र रिलांच करते हुए कहा कि बचत दर को बढ़ाने के लिए इसे बाजार में वापस लाया गया है। फिलहाल यह डाकघरों में उपलब्ध होगा लेकिन बाद में बैंकों में भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि किसान विकास पत्र को करेंसी नोट की तरह बनाया जाएगा ताकि इसे खरीदे कोई, भुनाए कोई। इसे पूरी तरह से हस्तांतरणनीय बनाया जाएगा, इसमें किसी का नाम नहीं होगा।
इस मौके पर उपस्थित वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार किसान विकास पत्र को निवेश के क्षेत्र में सोने के विकल्प के रूप में पेश करना चाहती है। इसलिए इसे खरीदना उतना ही आसान होगा, जितना कि सोना या उसके आभूषण खरीदना आसान होता है। तभी तो वित्त मंत्री ने संकेत दिया कि यह करेंसी नोट की तरह होगा जिसे कोई कहीं से खरीदे और कोई और दूसरी जगह से भुना ले। उनके मुताबिक इसमें पैन नंबर देने का भी कोई झंझट नहीं है, इसलिए इसे समाज के सभी वर्ग के लोग खरीद सकते हैं।
नए रूप में किसान विकास पत्र 1000, 5000, 10000, 20000 और 50000 के मूल्य वर्ग में मिलेंगे। इसके तहत परिपक्वता पर दो गुनी राशि मिलेगी और इसकी परिपक्वता अवधि 100 महीने (8.4 वर्ष) तय की गई है। फिलहाल इसे खरीदने के बाद कम से कम ढाई साल तक रखना होगा जो कि लॉक इन पीरियड कहलाता है। निवेशकों को इसके तहत निवेश पर कोई कर लाभ नहीं मिलेगा।
इस अवसर पर वित्त सचिव राजीव महर्षि ने बताया कि कुछ वर्ष पहले तक भारत में बचत की दर 36 फीसदी तक थी। लेकिन पिछले दो तीन वर्ष में यह घट कर 30 फीसदी से भी नीचे चली गई है। बचत दर घटेगी तो फिर निवेश के लिए ज्यादा राशि नहीं मिलेगी।
इसलिए सरकार ने किसान विकास पत्र को फिर से जारी करने का निर्णय लिया। उल्लेखनीय है कि इसे वर्ष 2011 में बंद कर दिया गया था। एक समय निवेशकों के बीच यह बेहद लोकप्रिय था क्योंकि महज साढ़े पांच वर्ष में निवेश की गई रकम दोगुनी हो जाती थी।