वित्तीय संकट के चलते आसमान से जमीन पर आई किंगफिशर एयरलाइंस पर देनदारी चुकाने का दबाव बढ़ता जा रहा है। एक ओर जहां सेवा कर विभाग ने एयरलाइंस का एक विमान जब्त कर लिया है, वहीं मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने इसके सात विमान सीज कर दिए हैं। सेवा कर विभाग दूसरा एयरक्राफ्ट जब्त करने की तैयारी कर रहा है। वहीं, एयरलाइंस को लीज पर विमान देने वाली अमेरिकी कंपनी ने भी अपने चार एयरबस विमान वापस मंगा लिए हैं।
देनदारी वसूलने के लिए जिस तरह किंगफिशर के विमानों पर कब्जे ही होड़ मची है, उससे एयरलाइंस की दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं। किंगफिशर के पास कुल 42 विमान हैं, जिन पर राजस्व विभाग और कर्जदाताओं की नजरें लगी हैं। वेंडरों और करों के भुगतान के अलावा बैंकों का किंगफिशर पर करीब 8 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। इसके अलावा कर्मचारियों का कई महीने का वेतन भी बकाया है।
मुंबई में सेवा कर विभाग की सहायक आयुक्त सारिका शाह ने एयरलाइंस को सोमवार को एक नोटिस भेजकर एटीआर श्रेणी का एयरक्राफ्ट जब्त करने की सूचना दी थी। जिसके जवाब में किंगफिशर ने कहा कि यह एयरक्राफ्ट लीज पर लिया गया है और कंपनी इसकी मालिक नहीं है और न ही कंपनी के खातों में इसे संपत्ति के तौर पर दर्शाया गया है।
ऐसे में यदि सेवा कर विभाग अपने आदेश पर कायम रहता है, तो कंपनी विभाग पर अपने नुकसान का दावा कर सकती है। सेवा कर विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, किंगफिशर करीब 190 करोड़ रुपये की टैक्स देनदारी की डिफाल्टर है। इसमें से 127 करोड़ रुपये के भुगतान का मामला अदालत में लंबित है जबकि 63 करोड़ रुपये की वसूली होनी है।
उधर, मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (एमआईएएल) ने 50 करोड़ रुपये के बकाया एयरपोर्ट शुल्क की वसूली के लिए किंगफिशर के सात एयरक्राफ्ट सीज कर दिए हैं। एयरपोर्ट से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पार्किंग और नेविगेशनल शुल्क की वसूली के लिए एयलाइंस को नोटिस भेजकर सात दिन का समय दिया गया था, जिसका कोई जवाब नहीं आया।
मिली जानकारी के मुताबिक, भुगतान न मिलने की वजह से विमान किराए पर देने वाली ब्रिटेन की एक कंपनी भी किंगफिशर से अपने चार एयरबस विमान वापस मंगा चुकी है। वेतन को लेकर हुई पायलटों और इंजीनियरों की हड़ताल के बाद किंगफिशर एयरलाइंस की उड़ानें गत 1 अक्तूबर से बंद हैं। जिसे देखते हुए नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने इसका फ्लाइंग लाइसेंस रद्द कर दिया था। उड़ानें दोबारा शुरू करने के लिए एयरलाइन को डीजीसीए के पास रिवाइल प्लान भेजना बाकी है।
एतिहाद को शेयर बेचने की तैयारी
किंगफिशर एयरलाइंस दुबई की एतिहाद एयरलाइंस को 48 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर पूंजी जुटाने की कोशिश कर रही है। लेकिन एतिहाद ने ऐसा कोई भी सौदा होने की खबरों से इनकार किया है। मंगलवार को इस खबर के बाद किंगफिशर के शेयर 5 फीसदी तक उछले। स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में कंपनी ने कहा है कि निवेश जुटाने के लिए एतिहाद समेत कई निवेशकों के साथ बातचीत चल रही है।
18 दिसंबर को विजय माल्या के जन्मदिन पर किंगफिशर कोई बड़ी घोषणा कर सकती है। विमानन क्षेत्र में सरकार ने गत सितंबर में 49 फीसदी एफडीआई को मंजूरी दी है, जिसके बाद दुबई की एतिहाद एयरलाइन किंगफिशर समेत कई दूसरी एयरलाइनों में हिस्सेदारी खरीदने के लिए बातचीत कर रही है। इस साल एतिहाद ऑस्ट्रेलिया की वर्जिन और जर्मनी की एयर बर्लिन का अधिग्रहण कर चुकी है, जबकि एयर सेशेल्स में भी इसने कुछ हिस्सेदारी खरीदी है।