कर्ज में डूबी किंगफिशर एयरलाइंस के कर्मचारियों और पायलटों को अभी तक प्रबंधन की ओर से वेतन के बारे में कोई आश्वासन नहीं मिला है। कंपनी के हड़ताली पायलटों का कहना है कि महीनों से वेतन न मिलने के कारण उनके क्रेडिट कार्ड के बकाए का भुगतान नहीं हो पा रहा है। कई कर्मचारियों को मकान मालिकों से मकान खाली करने की धमकी मिल रही है, तो कहीं गाड़ियों और मकानों की किस्त समय पर नहीं दिए जाने से बैंकों की ओर से धमकी मिल रही है।
कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी की वित्तीय हालत को देखते हुए कंपनी के खातों पर लगी रोक 5 अक्तूबर को इस लिए हटाई गई थी, ताकि कंपनी कर्मचारियों को वेतन का भुगतान कर सके, लेकिन कंपनी ने अभी तक इस बारे में कोई आश्वासन नहीं दिया है।
हालांकि कुछ कर्मचारियों को उम्मीद है कि दीपावली के पहले उन्हें कम से कम तीन महीने का बकाया वेतन मिल जाएगा। वह यह मानकर चल रहे हैं कि जबतक वेतन नहीं दिया जाएगा किंगफिशर को विमान सेवा शुरू करने की इजाजत नहीं मिलेगी।
इस बीच नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) कंपनी की ओर से अस्थाई तालाबंदी के बावजूद 13 अक्तूबर और उससे आगे के लिए टिकटों की अग्रिम बुकिंग की योजना पर रोक लगाने की योजना बना रहा है। गौरतलब है कि डीजीसीए के महानिदेशक अरुण मिश्रा ने सोमवार को कहा था कि उन्हें सूचना मिली है कि किंगफिशर टिकटों की अग्रिम बुकिंग करने जा रही है ऐसे में कंपनी को ऐसा नहीं करने का आदेश दिया है।
वेतन भुगतान की मांग को लेकर पायलटों और कर्मचारियों के हड़ताल के कारण किंगफिशर ने 12 अक्तूबर तक अस्थाई लाक आउट का एलान कर रखा है। डीजीसीए ने लॉकआउट के एलान के बाद किंगफिशर को कारण बताओ नोटिस जारी कर कहा है कि क्यों न उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाए। किंगफिशर ने अभीतक डीजीसीए के नोटिस का उत्तर नहीं दिया है।