कर्ज के बोझ तले दबी किंगफिशर एयरलाइंस के फिर से उड़ान भरने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। उड्डयन क्षेत्र की नियामक संस्था नागरिक विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने घरेलू एयरलाइंस के लिए जारी शीतकालीन कार्यक्रम में किंगफिशर की एक भी उड़ान को मंजूरी नहीं दी है। यह कार्यक्रम 28 अक्तूबर से लागू हो जाएगा।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक, डीजीसीए की ओर से मंजूर शीतकालीन कार्यक्रम के तहत हर हफ्ते 8 घरेलू एयरलाइंस की 10,935 उड़ानों को स्वीकृति दी गई है। ये उड़ानें देश के 73 हवाई अड्डों से संचालित होंगी। सबसे ज्यादा 2,515 उड़ानों के लिए जेट एयरवेज को अनुमति मिली है, हालांकि पिछले साल के मुकाबले जेट की 390 उड़ानें कम हैं।
इंडिगो की उड़ानों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल के मुकाबले इंडिगो की उड़ानें 1,879 से बढ़कर 2,447 हो गई हैं। इसी प्रकार, स्पाइसजेट, एयर इंडिया और गो-एयर की उड़ानें भी बढ़ गई हैं। जबकि, एलायंस एयर और जेट लाइट की उड़ानें कम हुई हैं। इस साल जुलाई में शुरू क्षेत्रीय एयरलाइंस मंत्रा को भी हर हफ्ते 42 उड़ानों की अनुमति मिल गई है।
पिछले साल डीजीसीए की ओर से स्वीकृति शीतकालीन कार्यक्रम में किंगफिशर की 2,930 उड़ानों को मंजूरी मिली थी। लेकिन एयरलाइंस की बिगड़ी वित्तीय स्थिति और कर्मचारियों की हड़ताल को देखते हुए डीजीसीए ने किंगफिशर की एक भी उड़ान को जगह नहीं दी है।
उधर, किंगफिशर मैनेजमेंट और हड़ताल पर गए कर्मचारियों के बीच बुधवार को हुई बैठक का कोई नतीजा सामने नहीं आया है। एयरलाइंस से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि उड़ानें दोबारा शुरू होने में थोड़ा वक्त लग सकता है। कंपनी पर फ्लाइंग परमिट रद्द होने का खतरा भी मंडरा रहा है। उसे 20 अक्तूबर तक डीजीसीए के कारण बताओ नोटिस का जवाब देना है।