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किंगफिशर का फ्लाइंग परमिट खतरे में

Sat, 06 Oct 2012 01:38 AM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
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आर्थिक संकट के चलते मुश्किल में फंसी किंगफिशर एयरलाइंस की दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं। कंपनी की ओर से 12 अक्तूबर तक आंशिक तालाबंदी की घोषणा को गंभीरता से लेते हुए नागरिक विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने शुक्रवार को कारण बताओ नोटिस दिया है। नोटिस में एयरलाइंस से पूछा गया है कि उसका शेड्ल्यूड ऑपरेटर परमिट क्यों न रद्द या फिर निलंबित कर दिया जाए। कंपनी को 15 दिन के भीतर इस नोटिस का जवाब देना है।
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केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री अजीत सिंह ने कहा है डीजीसीए किंगफिशर एयरलाइंस की पूरी स्थिति की समीक्षा कर रहा है। आगे क्या कार्रवाई की जा सकती है, इस बारे में कानूनी राय ली जा रही है। उन्होंने कहा कि असंतुष्ट कर्मचारियों के साथ-साथ यह उड़ानों की सुरक्षा का भी मुद्दा है। अब किंगफिशर एयरलाइंस को उड़ान भरने की अनुमति तभी मिलेगी, जब सुरक्षा के मुद्दे पर डीजीसीए संतुष्ट होगा।

नोटिस में नागर विमानन महानिदेशक अरुण मिश्रा ने कहा कि किंगफिशर एयरलाइंस मानकों के अनुरूप सुरक्षित, प्रभावी और भरोसेमंद सेवाएं देने में नाकाम रही है। एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937 के अनुसार डीजीसीए सुरक्षा कारणों के आधार पर किसी एयरलाइन का फ्लाइंग परमिट रद्द कर सकता है। बकाया वेतन के भुगतान को लेकर इंजीनियरों और पायलटों के हड़ताल पर जाने के बाद किंगफिशर एयरलाइंस के सीईओ ने डीजीसीए को 4-5 अक्तूबर तक मामले सुलझा लेने का भरोसा दिया था। डीजीसीए का कहना है कि एयरलाइन ने अभी तक कोई उड़ान फिर से बहाल करने का कोई प्लान नहीं दिया है। डीजीसीए ने नोटिस में कहा है कि पिछले 10 महीनों के दौरान किंगफिशर अपने शेड्यूल पर काम नहीं रह पाई है। इसकी उड़ानें बार-बार रद्द हुईं।
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उधर, प्रबंधन की ओर से हड़ताल पर गए कर्मचारियों को मनाने की सभी कोशिशें नाकाम रही हैं। मुंबई और गुड़गांव की वार्ता बेनतीजा रहने के बाद शुक्रवार को बंगलूरू और चेन्नई में कर्मचारियों से होने वाली मीटिंग रद्द हो गई है। कर्मचारी पहले वेतन देने की मांग कर रहे हैं, जबकि प्रबंधन की ओर से उन्हें अभी तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। इससे गुस्साए कर्मचारी सड़कों पर उतर आए और दिल्ली, मुंबई और बंगलूरू में प्रदर्शन किया।

इससे पहले, गुरुवार देर रात किंगफिशर एयरलाइंस के प्रवक्ता ने आंशिक तालाबंदी के लिए कुछ कर्मचारियों की गैरकानूनी हड़ताल को जिम्मेेदार ठहराते हुए इसे 12 अक्तूबर तक बढ़ाने की घोषणा कर दी थी। इससे कर्मचारियों में काफी रोष है। आर्थिक तंगी के चलते किंगफिशर के एक कर्मचारी की पत्नी की आत्महत्या ने भी कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी। हड़ताल में शामिल एक कर्मचारी का कहना है कि हमें छह-सात महीनों से वेतन नहीं मिला है और बकाया वेतन कब मिलेगा इस बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं है। सभी कर्मचारियों के लिए घर चलाना मुश्किल हो गया है। लोग डिप्रेशन में हैं।

हालांकि, एयरलाइन को थोड़ी राहत देते हुए बैंक 60 करोड़ रुपये देने के लिए तैयार हो गए हैं। लेकिन देखना होगा कि यह पैसा कंपनी को कब तक मिलता है और इसमें से कितना पैसा कंपनी कर्मचारियों के बकाया वेतन पर बांटती है। इस एयरलाइन पर करीब 7,000 करोड़ रुपये का कर्ज है, जबकि कंपनी का घाटा भी करीब 8,000 करोड़ रुपये से अधिक है। देश के 17 प्रमुख बैंकों ने किंगफिशर एयरलाइंस को यह कर्ज दिया है, जिसे लेकर वे भी चिंतित हैं।
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