राजकोषीय समेकन पर बनी केलकर समिति ने सभी तरह की सब्सिडी खत्म करने का सुझाव दिया है। समिति ने डीजल के दाम में चार रुपए प्रति लीटर और गैस में 50 रुपए प्रति सिलेंडर इजाफा करने की सिफारिश की है। साथ ही अनाज और खाद की सब्सिडी खत्म करने का सुझाव दिया है। हालांकि सरकार ने फिलहाल इस रिपोर्ट को नामंजूर करने के संकेत दिए हैं। रिपोर्ट में दिए सुझावों पर सरकार ने जनता से राय मांगी है।
रिपोर्ट को सार्वजनिक करते हुए वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के सचिव अरविंद मायाराम ने कहा कि केलकर समिति की सिफारिशों में सभी प्रकार की सब्सिडी को समाप्त करना प्रमुख है, जो सरकार के रुख के अनुकूल नहीं है। सरकार का मानना है कि एक सीमा तक सब्सिडी जरूरी है और इससे मुंह नहीं मोड़ा जा सकता है। फिलहाल केलकर समिति की रिपोर्ट विचाराधीन है और अभी सरकार ने किसी भी सुझाव पर कोई फैसला नहीं किया है।
केलकर समिति ने गत 3 सितंबर को अपनी रिपोर्ट वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को सौंप दी थी, जिसे शुक्रवार को सार्वजनिक किया गया है। सरकार इस मामले पर व्यापक बहस चाहती है। इसलिए रिपोर्ट को वित्त मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध कराकर जनता की राय मांगी गई है।
मायाराम का कहना है कि सरकार राजकोषीय घाटे को तय लक्ष्य के आसपास रखने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार जरूरी खर्चों में कटौती करने की बजाय अनावश्यक खर्चों में कमी लाने की नीति पर अमल करेगी। मौजूदा विनिवेश योजनाओं के अलावा दूसरी कंपनियों का भी विनिवेश किया जा सकता है। लेकिन भूमि की बिक्री के जरिये राजस्व अर्जित करना राजकोषीय समेकन में शामिल नहीं है।
केलकर समिति के प्रमुख सुझाव
- आधी डीजल सब्सिडी चालू वित्तवर्ष में खत्म करने और बाकी को अगले वित्तवर्ष में खत्म कर देना चाहिए
- कूकिंग गैस पर सब्सिडी 2015 तक समाप्त की जाए
- केरोसिन सब्सिडी में दो तिहाई कमी लाकर दाम दो रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाया जाए
- खाद्य सब्सिडी को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की योजना बने
- बाल्को की बची हिस्सेदारी भी बेची जाए