जेट-ऐतिहाद सौदे में अहम भूमिका निभाने वाले अबू धाबी के साथ हुए हवाई सीटों के समझौते पर विवाद बढ़ता जा रहा है। हालांकि अभी तक इस समझौते को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी नहीं मिली है।
इस बीच जेट-ऐतिहाद डील को फायदा पहुंचाने के आरोप तूल पकड़ रहे हैं। नागर विमानन मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक इसके लिए तैयार नोट कैबिनेट की मंजूरी के लिएभेज दिया गया है।
जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चिट्ठी लिखकर जेट-ऐतिहाद सौदे और अबू धाबी की हवाई सीटें बढ़ाने के समझौते की जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांग पर विचार नहीं किया गया तो वह इस मामले में 2जी की तरह अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
पूर्व नागर विमानन मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने अबू धाबी के साथ हुए समझौते पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सिविल एविएशन पर बनी संसद की स्थायी समिति भी एयर इंडिया के हितों की अनदेखी कर हुए इस समझौते पर कड़ा ऐतराज जता चुकी है।
नागर विमानन मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अबू धाबी के साथ हवाई सीटें बढ़ाने का करार करवाने का फैसला मंत्रालय ने अपने स्तर पर नहीं लिया था। यह समझौता वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की अध्यक्षता वाले अंतर मंत्रालय समूह (आईएमजी) की शह पर हुआ है।
गत 22 अप्रैल को वित्त मंत्री की अध्यक्षता में हुई आईएमजी की बैठक में अबू धाबी के साथ हवाई सीटों की संख्या प्रति सप्ताह बढ़ाकर 40 हजार करने पर सहमति बनी थी। इसके अगले दिन ही दोनों देशों के बीच सीटों की संख्या अगले तीन साल में 13,330 से बढ़ाकर 50,270 करने के लिए द्विपक्षीय समझौता हो गया था।
इसके साथ ही जेट एयरवेज में ऐतिहाद ने 24 फीसदी इक्विटी खरीदी थी, जो देश में नागर विमानन में पहला प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) है। लेकिन अब विवाद बढ़ता देख नागर विमानन मंत्रालय इस मामले से पल्ला झाड़ने की मुद्रा में आ गया है।
सीटें बढ़ाने के फैसले पर कैबिनेट की मुहर पर मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि मंत्रालय द्वारा भेजे गए कैबिनेट नोट पर जल्द ही फैसला हो सकता है।
पूर्व नागर विमानन मंत्री रूडी का कहना है कि जेट-ऐतिहाद सौदा और इसे फायदा पहुंचाने के लिए अबू धाबी से हुआ हवाई समझौता राष्ट्र हितों के पूरी तरह खिलाफ है।
जेट-ऐतिहाद की डील एफडीआई और सिविल एविएशन के मानकों को भी पूरा नहीं करती है। राष्ट्र हितों की अनदेखी कर गैरकानूनी तरीके से यह समझौता करवाया गया है।
सुब्रह्मण्यम स्वामी ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में पूरे मामले को अदालत में चुनौती देने की चेतावनी दी है। उन्होंने इस सौदे को लेकर वित्त मंत्रालय और सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।