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घाटा रोकने के लिए जरूरी है कड़वी दवा

Sat, 05 Jul 2014 08:57 AM IST
प्रशांत श्रीवास्तव/अमर उजाला दिल्ली
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अर्थशास्त्रियों के अनुसार सरकार को अर्थव्यवस्था की सेहत को देखते हुए बजट में सब्सिडी कम करने जैसे सख्त कदम उठाने होंगे। यदि वह ऐसा करती है, तो लंबी अवधि के लिए रोजगार से लेकर महंगाई आदि सभी पर सकारात्मक असर होगा। सरकार के लिए चिंता की बात यह है कि चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीने में ही जीडीपी के 45.6 फीसदी के स्तर पर पहुंच गया है। हाल ही में वित्त मंत्री अरूण जेटली भी इस बात का संकेत दे चुके हैं कि बजट लोक लुभावन न होकर ठोस कदमों वाला होगा। सब्सिडी बोझ कम करने के साथ खर्च में करनी होगी कटौतीकोटक महिंद्रा बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री इंद्रनील पाल ने अमर उजाला को बताया कि अर्थव्यवस्था को सुस्ती से उबारने के लिए जरूरी है कि सरकार अपने खर्च में कटौती करें और आय में बढ़ोतरी करें। इसके लिए जरूरी है कि वह डीजल, केरोसिन, एलपीजी आदि पर सब्सिडी खत्म करे। इसके अलावा सरकार को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) और डायरेक्ट टैक्स कोड (डीटीसी) को अमल में उठाने के कदम उठाने होंगे।उद्योगों के रिवाइवल का खाका पेश कर सरकार बढ़ा सकती है आयआरपीजी ग्रुप के अर्थशास्त्री डी.एच.पाई.पनंदिकर के अनुसार बजट घाटा इस समय 4.6 फीसदी के स्तर पर है। इसी तरह औद्योगिक ग्रोथ भी न के बराबर है। बजट में वित्त मंत्री को बजट घाटा 4.0 फीसदी लाने के साथ-साथ औद्योगिक उत्पादन के रिवाइवल के कदम उठाने होंगे। पनंदिकर के अनुसार सरकार के लिए मौजूदा हालात में सब्सिडी खत्म करने जैसे कदम उठाना काफी मुश्किल है, ऐसे में वह उद्योग जगत को इनसेटिंव देकर एक साल में इंडस्ट्रियल ग्रोथ 5 फीसदी करके 2लाख करोड़ रुपये अतिरिक्त टैक्स जुटा सकती है। इसके अलावा शेयर बाजार के अनुकूल होने से सरकार को विनिवेश लक्ष्यों में बढ़ोतरी कर ज्यादा से ज्यादा पूंजी जुटाने के कदम उठाने होंगे। जिससे कि सरकार की आय बढ़ सके। हालांकि सरकार को ग्रोथ बरकरार रखने के लिए विनिवेश से मिली पूंजी को पूंजीगत खर्च में लगानी होगी। मोतीलाल ओसवॉल सिक्योरिटीज के रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक सरकार को सब्सिडी जीडीपी के मुकाबले 2 फीसदी से ज्यादा नहीं होने देना चाहिए। इसके अलावा ज्यादा से ज्यादा योजनागत खर्च बढ़ाने की जरूरत है। जीएसटी को भी जल्द से जल्द लागू करने की जरूरत है। क्या है चुनौतियां -राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष में 4.3 फीसदी रहने की आशंका-अभी तक मानसून का सामान्य से 43 फीसदी तक कम होना-इस साल के अनुमान से तेल सब्सिडी बिल  50 फीसदी बढऩे की आशंका-योजनागत खर्च घट कर 30 फीसदी पहुंचना-इराक संकट और महंगाई में फिर से तेजी की आशंकाक्या हैं मांगे-जीएसटी और डीटीसी को अमल में लाया जाय-योजनागत खर्च बढ़ाने पर हो जोर-डीजल, एलपीजी, केरोसिन की सब्सिडी में कटौती-इंडस्ट्री के रिवाइवल के लिए इनसेंटिव-विनिवेश से हुई आय को पूंजीगत खर्च पर हो निवेश-बजट घाटे को 2 फीसदी के स्तर पर लाया जाय
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