उत्पाद शुल्क और सेवा कर न चुकाने वालों को अब जेल जाना पड़ सकता है। लोकसभा में वित्त मंत्री पी चिदंबरम द्वारा पेश वित्त विधेयक में कर चोरी के मामले में जेल की सजा दिए जाने के स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। इसके अलावा कर चोरी के बड़े मामलों को गैर जमानती बनाने का प्रावधान भी बिल में किया गया है।
वित्त विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक 50 लाख रुपये से अधिक के उत्पाद शुल्क की कर चोरी को अब संज्ञेय अपराध माना जाएगा और यह गैर जमानती होगा। इसी तरह सेवा कर में 50 लाख रुपये से अधिक की कर चोरी के मामले में सात साल के कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है।
वित्त विधेयक में धारा 91 के तहत उत्पाद शुल्क विभाग (एक्साइज डिपार्टमेंट) के अधीक्षक (सुपरिटेंडेंट) या उससे ऊपर के स्तर के अधिकारियों को कर चोरी के कुछ निर्धारित मामलों में गिरफ्तारी का अधिकार देने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा वित्त विधेयक में धारा 135 के तहत आयात शुल्क (कस्टम ड्यूटी) से संबंधित कम से कम चार मामलों को गैर जमानती बनाने का प्रावधान भी किया गया है। इसमें अवैध रूप से एक करोड़ रुपये से अधिक का आयात या निर्यात करना शामिल है।
इसके अलावा फर्जी तरीके से कस्टम ड्यूटी से बचने की कोशिश का मामला 50 लाख रुपये से अधिक का होने पर इसे गैर जमानती अपराध मानने का प्रावधान भी बिल में शामिल है। वित्त विधेयक के कड़े प्रावधान चालू वित्तीय वर्ष (2012-13) के लिए निर्धारित उत्पाद शुल्क व आयात कर की वसूली का लक्ष्य न हासिल किए जा पाने के बाद पेश किए गए हैं।
चालू वित्तीय वर्ष में आयात शुल्क के लिए 1.87 लाख करोड़ रुपये के कर संग्रह का लक्ष्य रखा गया था, जबकि कर वसूली केवल 1.65 करोड़ तक रहने की संभावना है। इसी तरह उत्पाद शुल्क का लक्ष्य 1.94 लाख करोड़ रुपये था, जबकि वसूली 1.72 करोड़ रुपये ही रहने की उम्मीद है।