आयकर विभाग ने चालू वित्त वर्ष में 30 सितंबर को समाप्त छमाही में काले धन की कमाई से खरीदी गई 290.29 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त किया है। वित्त वर्ष 2000-12 में ऐसी कुल 905.6 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई थी। यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री एसएस पलानिमणिकम ने लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में दी है।
उन्होंने कहा कि सरकार काले धन पर नकेल कसने के लिए कई तरह के प्रयास कर रही है। इसके तहत आयकर विभाग आयकर रिटर्न की पुनरीक्षा करने और पेनाल्टी लगाने जैसे कदम उठा रहा है। सरकार के कदमों के चलते पिछले दस सालों के दौरान देश में प्रत्यक्ष कर संग्रह में छह गुनी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
यह वित्त वर्ष 2001-02 के 69,198 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2010-11 में 4,46,070 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। वित्त वर्ष 2001-02 में जीडीपी में प्रत्यक्ष करों का योगदान 3.03 फीसदी था, जोकि वित्त वर्ष 2010-11 में बढ़कर 5.66 फीसदी तक पहुंच गया।
कर संग्रह में हुई इस बढ़ोतरी के चलते दस साल में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में प्रत्यक्ष कर संग्रह की राशि का योगदान करीब दो गुनी हो गई है। इससे देश की कर संग्रह की प्रणाली में सुधार और दक्षता का स्पष्ट संकेत मिलता है।
कर संग्रह को बढ़ाने के लिए मारीशस और सिंगापुर में भी आयकर विभाग की विदेश इकाइयां (आईटीओयू) खोली गई है। इसके अलावा हाल में गठित आईटीओयू के तहत साइप्रस, फ्रांस, जर्मनी, जापान, नीदलैंड्स, संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका में भी अधिकारियों की तैनाती के निर्देश दिए गए हैं।