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इंटरनेट यूजर्स बढ़े, लेकिन सर्विस प्रोवाइडर घटे

Sun, 20 Jan 2013 08:39 PM IST
नई दिल्ली/धीरज कनोजिया
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इंटरनेट पर गाने सुनना, कोई सूचना लेना या सोशल नेटवर्किंग का इस्तेमाल। कंप्यूटर की जानकारी रखने वालों के लिए इंटरनेट उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है। मगर देशभर में तेजी से बढ़ रहे इंटरनेट यूजर्स को शायद ही पता होगा कि उनके लिए यह सेवा देने वाले इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडरों की संख्या भी उतनी ही तेजी से घटती जा रही है।
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यही वजह है कि इस सेवा पर कुछ बड़ी टेलीकॉम कंपनियों का एकाधिकार होता जा रहा है, जो अपने हिसाब से कीमतों को बढ़ाकर पूरे बाजार को प्रभावित कर रही हैं। इंटरनेट के कारोबार में ग्राहकों को सेवा देने वाले छोटे इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडरों की संख्या घटकर देशभर में महज 150 रह गई है, जबकि दूरसंचार विभाग ने 907 लाइसेंस जारी किए थे। ताजा आंकड़ों के मुताबिक देशभर में इंटरनेट यूजर्स की संख्या तेजी से बढ़ते हुए 13 करोड़ 70 लाख के पार हो गई है।

इंटरनेट सेवा देने वाली कंपनियों का कहना है कि सरकार की नीति बड़ी टेलीकॉम कंपनियों के हित में ज्यादा है। जानबूझकर नियमों को बदला जा रहा है ताकि इंटरनेट सेवा में सिर्फ बड़ी कंपनियां रह जाए। सरकार नई नीति के तहत अब उन कंपनियों को ही यूनीफाइड लाइसेंस देने का प्रस्ताव करने जा रही है, जिसकी पेड अप पूंजी 25 करोड़ रुपये है।
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इससे छोटी कंपनियां खुद ही स्पर्धा से बाहर हो जाएंगी, क्योंकि वह इतनी बड़ी राशि जुटाने में सक्षम नहीं है। साथ ही नई टेलीकॉम पॉलिसी-2012 के तहत इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर यानी आईएसपी पर सालाना कुल राजस्व पर आठ फीसदी कर लगाने की बात भी छोटे कारोबारियों के हित में नहीं है।

सरकार छोटे कारोबारियों के हक में नीति नहीं बना रही है। जबकि बड़ी टेलीकॉम कंपनियां अपने इंटरनेट ब्राडबैंड को गांवों में पहुंचाने में टालमटोल कर शहरों में ही सेवा देकर मुनाफा कूटने में जुटी हुई हैं। -- राजेश छारिया, अध्यक्ष (इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर एसोसिएशन ऑफ इंडिया संघ)
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--907 के करीब थे इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर, अब महज 150 के आसपास सिमट गए।
--13 करोड़ 70 लाख है देश में इंटरनेट यूजर्स की संख्या।
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