इंटरनेट की दरें 30 फीसदी तक महंगी हो सकती हैं। दूरसंचार विभाग ने नए टेलीकॉम लाइसेंस समझौते में एक संशोधन कर इंटरनेट सेवाओं से हासिल रेवेन्यू पर सेस लगाने का फैसला किया है।
दो अगस्त को जारी हुए यूनिफाइड लाइसेंस के शुरुआती संस्करण में डॉट (दूरसंचार विभाग) ने इंटरनेट सेवाओं से हासिल रेवेन्यू को एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) के दायरे से अलग कर दिया था। एजीआर टेलीकॉम कंपनियों के राजस्व का वह हिस्सा है, जिसके आधार पर वार्षिक लाइसेंस फीस तय की जाती है।
डॉट ने कहा था कि इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडरों के कुल राजस्व में से पूरी तरह इंटरनेट सेवाओं (एक्सेस और कंटेंट) से हासिल राजस्व में कटौती, बिक्री कर भुगतान और दूसरे ऑपरेटरों को दिए जाने वाले रोमिंग शुल्क को काट कर ही एजीआर की गणना की जाएगी। लेकिन संशोधन में कहा गया है प्योर इंटरनेट सर्विस से राजस्व के मद में डिडक्शन हटा दिया गया है।
नए लाइसेंसों के तहत टेलीकॉम ऑपरेटरों (सर्विस प्रोवाइडर समेत) को एजीआर पर वार्षिक आठ फीसदी शुल्क यूनिफॉर्म लाइसेंस फीस के तौर पर देनी होगी।
इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडरों ने कहा है कि इस संशोधन से उपभोक्ताओं के लिए इंटरनेट दरें 30 फीसदी महंगी हो जाएगी। इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट राजेश छारिया ने कहा है कि इस कदम से देश में खासकर ग्रामीण इलाकों में ब्रॉडबैंड की पहुंच धीमी हो जाएगी।