बीमा क्षेत्र में कारोबार की असीम संभावनाएं हैं। 49 फीसदी एफडीआई निवेश के फैसले से इस क्षेत्र में 3 से 3.5 अरब डॉलर का निवेश आ सकता है। साथ ही इसके जरिए न केवल बीमा कंपनियों का विस्तार होगा, बल्कि ग्राहकों को भी बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी। इसके अलावा, बीमा क्षेत्र बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित कर सकेगा। निजी क्षेत्र की जीवन बीमा कंपनी एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के एमडी एवं सीईओ अमिताभ चौधरी का ऐसा मानना है। पेश है अमर उजाला के प्रशांत श्रीवास्तव की अमिताभ चौधरी के साथ हुई बातचीत के प्रमुख अंश -
प्रश्न : कैबिनेट ने बीमा क्षेत्र में 49 फीसदी एफडीआई की मंजूरी दी है, इसका इंडस्ट्री पर किस तरह का असर होगा?
उत्तर : बीमा क्षेत्र में 49 फीसदी एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) का इंडस्ट्री 14 साल से इंतजार कर रही है। मोदी सरकार ने इस दिशा में अहम पहल की है। हमें उम्मीद है कि इस प्रस्ताव को जल्द ही संसद की भी मंजूरी मिल जाएगी। पूंजी की कमी से जूझ रही इंडस्ट्री के लिए यह कदम काफी कारगर होगा। सभी मुद्दों के स्पष्ट हो जाने और संसद की मंजूरी मिलने के बाद 8 से 9 महीने के भीतर इंडस्ट्री में 3 से 3.5 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आ सकता है। जिससे देश में बीमा क्षेत्र के विकास में तेजी आएगी।
प्रश्न : किन मुद्दों पर इंडस्ट्री स्पष्टीकरण चाह रही है? सरकार ने 26 फीसदी से ज्यादा एफडीआई बढ़ाने पर राइडर रखे हैं, इसका क्या असर होगा?
उत्तर: कैबिनेट ने अपने फैसले में यह प्रावधान किया है कि 49 फीसदी एफडीआई आने के बावजूद कंपनी के प्रबंधन पर भारतीय प्रोमोटर का नियंत्रण होगा। इस मुद्दों के लेकर इंडस्ट्री स्पष्टीकरण चाहती है। क्योंकि, जो विदेशी कंपनियां पहले से ही भारतीय कंपनियों के साथ संयुक्त उपक्रम के तहत कारोबार कर रही हैं, वह नए निवेश से पहले इस प्रावधान को पूरी तरह से समझना चाहेंगी कि सरकार की मंशा क्या है। जहां तक 26 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी बढ़ाने की बात है, तो उसके लिए एफआईपीबी की मंजूरी का प्रावधान है। शायद, सरकार इसके जरिए आसानी से कंपनियों के शेयरहोल्डिंग पैटर्न पर नजर रख सकेगी।
प्रश्न : जब वैैश्विक स्तर पर आर्थिक सुस्ती है, ऐसे में क्या भारत में एफडीआई आएगा?
उत्तर : भारतीय बीमा बाजार में असीम संभावना है। देश के अभी बहुत कम लोगों तक बीमा उत्पादों की पहुंच है, जो कि बदलते दौर में सभी नागरिकों के लिए अहम है। भारत में सभी विदेशी बीमा कंपनियां निवेश के लिए तत्पर हैं। अभी तक जो भी कंपनियां भारत से गई हैं, वह भी भारत के कारण नहीं गई हैं। वह एशियाई बाजार में कारोबारी नीति या दूसरी वजहों से अलग हुई हैं। ऐसे में यह तय है कि बीमा क्षेत्र में तेजी से एफडीआई आएगा।
प्रश्न : एफडीआई आने से क्या भारत में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे?
उत्तर : पूंजी आने से बीमा कंपनियां तेजी से विस्तार करेंगी, जिसका असर हर क्षेत्र पर होगा। नए इलाकों तक जहां कंपनियों की पहुंच बढ़ेगी, वहीं रोजगार के भी ज्यादा अवसर आएंगे। इसके अलावा तकनीकी स्तर पर भी इंडस्ट्री में काफी बदलाव आएगा, जिसका फायदा सभी स्तर पर पहुंचेगा।
प्रश्न : एचडीएफसी लाइफ की आईपीओ बाजार में उतरने की तैयारी पहले से है, यह कब बाजार में आएगा?
उत्तर : हमारे निवेशक चाहते हैं कि कंपनी आईपीओ लाए। लेकिन इसको लाने से पहले हम संसद द्वारा बीमा संशोधन बिल की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। उसके बाद उचित समय को देखते हुए आईपीओ लाया जाएगा। नए नियमों के तहत 25 फीसदी हिस्सेदारी कम करनी होगी। इन सब पहलुओं को देखते हुए रोडमैप तैयार होगा।
प्रश्न : कंपनी अभी बैंक इंश्योरेंस मॉडल पर ज्यादा फोकस करती है, क्या दूसरे चैनल पर भी फोकस बढ़ाएगी?
उत्तर : हमारे कुल कारोबार में 70 फीसदी बैंक इंश्योरेंस चैनल की हिस्सेदारी है। हम इस मॉडल में इंडस्ट्री में अग्रणी हैं। इसके अलावा 18-19 फीसदी एजेंसी चैनल और 7-8 फीसदी डायरेक्ट चैनल की हिस्सेदारी है। कंपनी सभी चैनलों को बढ़ाने पर फोकस कर रही है। हमारा लक्ष्य है कि एजेंसी चैनल को 18-19 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी करें।
प्रश्न : इंडस्ट्री में अभी ग्रॉसरूट लेवल पर प्रशिक्षित लोगों की कमी है। साथ ही नौकरी छोड़ने की भी दर कहीं ज्यादा है, इसको लेकर किस तरह के पहल की जरूरत है?
उत्तर : एचडीएफसी लाइफ ने इस समस्या को दूर करने के लिए एक नई पहल की है। हमने मनीपाल ग्लोबल सर्विसेज के साथ समझौता किया है। जिसके तहत चुने हुए प्रशिक्षुओं को हम कुल छह महीने का प्रशिक्षण देंगे। प्रोगाम के तहत हम 6 महीने की इंटर्नशिप भी कराते हैं। साथ ही इस दौरान उन्हें मानदेय भी देते हैं। प्रशिक्षुओं को डिप्लोमा मिलेगा। उसके बाद उन्हें एचडीएफसी लाइफ में नौकरी की भी गारंटी मिलेगी। यदि यह पहल कामयाब होती है, तो हम दूसरी संस्थाओं को भी अपने साथ जोड़ेंगे।