बढ़ती महंगाई, नौकरियों की घटती संभावनाओं और वेतन में कम बढ़ोतरी की वजह से इस वर्ष का त्योहारी सीजन फीका रहेगा। उद्योग संगठन एसोचैम ने एक अध्ययन रिपोर्ट में ऐसे आसार जताए हैं। सर्वेक्षण के मुताबिक मध्य एवं कम आय वर्ग के 71 प्रतिशत लोगों का मानना है कि बढ़ती महंगाई की वजह से त्योहारों का रंग फीका हो गया है। बढ़ती महंगाई और खराब होती आर्थिक स्थिति की वजह से लोग आगामी त्योहारी सीजन में पिछले वर्ष की तुलना में खर्चों पर लगाम लगाने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
त्योहारी खर्चों में कटौती करने वाले शहरों में दिल्ली सबसे अव्वल रहा। इस मामले में मुंबई दूसरे, अहमदाबाद तीसरे, चंडीगढ़ चौथे, कोलकाता पांचवें और चेन्नई छठे स्थान पर रहा। खाद्य महंगाई दर के दो अंकों में पहुंचने और ऊंची ब्याज दरों के बावजूद उच्च आय वर्ग पर कोई विशेष असर नहीं पड़ा है, क्योंकि उनकी आय और व्यय पर इससे फर्क नहीं पड़ता है। मध्य एवं कम आय वालों ने खर्चों में कटौती के उपाय ढूंढने के संकेत दिए हैं। सर्वेक्षण में शामिल लोगों ने भविष्य में व्यय में कमी करने की बात कही है।
सर्वेक्षण में शामिल अधिकांश लोगों ने कहा है कि कीमतों में भारी बढ़ोतरी होने, और मासिक किस्तों (ईएमआई) का बोझ बढ़ने की वजह इस त्योहारी सीजन में वे अपने व्यय को नियंत्रित करने की योजना बना रहे हैं। अधिकांश लोगों ने कहा कि व्यक्तिगत खर्चों को सीमित करने या त्योहारी बजट को नियंत्रण में बनाए रखने पर विशेष जोर देंगे। करीब 54 प्रतिशत लोगों ने कहा है कि वे त्योहारी सीजन में सेल या छूट में ही खरीद करेंगे, जबकि 27 प्रतिशत का कहना है कि वे मिठाई और कपड़ो आदि की खरीद में कमी करेंगे।
इसी तरह से 12 प्रतिशत लोगों ने किफायती उपहार खरीदने बात कही है, तो पांच प्रतिशत ने रीसायकिल वाले उपहार खरीदने पर जोर दिया है। सर्वेक्षण में शामिल 87 प्रतिशत लोगों ने कहा है कि पिछले एक वर्ष में खाने पीने की वस्तुओं पर व्यय 200 प्रतिशत की भारी वृद्धि के साथ औसत व्यय दो हजार से बढ़कर छह हजार मासिक पर पहुंच चुका है। पिछले कुछ महीने में सब्जियों और बेकरी की कीमतों में भी भारी वृद्धि हुई है, जिससे दीवाली का रंग भी फीका पडे़गा। सर्वेक्षण में शामिल 68 फीसदी लोगों ने कहा है कि वे अपने बजट में से तीन प्रतिशत राशि सोने की खरीद पर, 27 प्रतिशत मिठाई और कपड़ों, नौ प्रतिशत वाहन, आठ प्रतिशत उपहार, खाद्य और पेय, 12 प्रतिशत राशि मकान पर और शेष आठ प्रतिशत राशि इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं पर व्यय करेंगे।
बहुत कम ही लोगों ने कहा है कि त्योहार के दौरान शॉपिंग के लिए वे लोन लेंगे या बचत में कमी करेंगे। सर्वेक्षण में शामिल कर्मचारियों में से 20 प्रतिशत तक ने कहा है कि वह अपनी मासिक आय का 46 प्रतिशत त्योहारी खरीद पर व्यय करेंगे, जबकि 21 से 40 प्रतिशत ने कहा है कि इस वह 26 प्रतिशत व्यय करेंगे। करीब 65 प्रतिशत लोगों ने कहा है कि दिवाली के अवसर पर वे घर पर ही मिठाई बनाने को प्राथमिकता देंगे। यह सर्वेक्षण अगस्त और सितंबर में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद, हैदराबाद, पुणे, चंडीगढ़ और देहरादून में किया गया। इसमें प्रत्येक शहर से नौकरी-पेशा वर्ग के 200 लोगों से बातचीत की गई।