पेट्रोलियम पदार्थ व खाने-पीने की चीजों की कीमतों में आई गिरावट के कारण थोक महंगाई दर नवंबर माह में शून्य फीसदी के साथ पिछले पांच साल के न्यूनतम स्तर पर आ गई। पिछले छह महीनों से महंगाई दर में लगातार कमी आ रही है। वर्ष 2009 के जुलाई महीने में महंगाई दर शून्य से नीचे चली आई थी।
उसके बाद से इस साल नवंबर की शून्य दर सबसे कम बताई गई है। नवंबर माह में खाद्य वस्तुओं व मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की महंगाई दर क्रमश: 0.63 फीसदी व 2.04 फीसदी रही। वहीं नवंबर में गैर खाद्य पदार्थों की महंगाई दर -3.65 फीसदी रही।
थोक महंगाई दर में आई इस गिरावट के बाद औद्योगिक संगठन व आर्थिक विशेषज्ञों ने ब्याज दरों में कटौती की मांग तेज कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि मांग में बढ़ोतरी के लिए ब्याज दरों में कटौती आवश्यक है। आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक थोक महंगाई दर में कई ऐसी चीजें शामिल होती हैं जिससे आम आदमी का कोई लेना-देना नहीं होता है। इसलिए अभी शून्य दर को मुद्रा संकुचन की ओर बढ़ता कदम नहीं कहा जा सकता है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक नवंबर महीने में खाने-पीने की वस्तुओं में सबसे अधिक सब्जियों के दाम में 28.57 फीसदी की गिरावट रही। इस दौरान प्याज और गेहूं के भाव में क्रमश: 56.28 फीसदी व 2.31 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि नवंबर महीने में दूध के दाम में 10 फीसदी, फल में 14.78 फीसदी और अंडा, मांस-मछली में 4.36 फीसदी की बढ़ोतरी रही। चावल के भाव में 5.55 फीसदी की इजाफा हुआ। गैर खाद्य पदार्थों की श्रेणी में नवंबर माह में पेट्रोल के दाम में 9.96 फीसदी तो हाई स्पीड डीजल की कीमतों में 2.97 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।