देश के औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार सुस्ती की भेंट चढ़ गई है। लगातार दूसरे महीने औद्योगिक उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है। सरकार के सामने रुपये के साथ-साथ अर्थव्यवस्था की कमजोरी दूर करने की चुनौती बढ़ती जा रही है।
सरकार की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, गत जून के दौरान औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 2.2 फीसदी की गिरावट आई है।
मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में 2.2 फीसदी और खनन में 4.1 फीसदी की कमी आई है। देश का बिजली उत्पादन स्थिर बना हुआ है। सबसे ज्यादा झटका टीवी, फ्रिज जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल के उत्पादन में आई 10.5 फीसदी की गिरावट से लगा है।
इसी तरह फर्नीचर आदि के निर्माण में करीब 24 फीसदी की कमी आई है। इससे पहले मई में भी आईआईपी में 1.6 फीसदी की कमी आने का अनुमान था, जिसे संशोधित कर 2.8 फीसदी कर दिया गया है।
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में 75.5 फीसदी का भारांश रखने वाले मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की ग्रोथ चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 1.2 फीसदी गिरी है। जबकि इस दौरान आईआईपी 1.1 फीसदी गिरा है।
सिगरेट और आभूषणों के उत्पादन में गिरावट
गत जून के दौरान सिगरेट का उत्पादन पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 25 फीसदी घटा है। रत्न और आभूषणों से जुड़े उत्पादन में भी करीब 32 फीसदी कमी आई है।
मोटर वाहनों के निर्माण में 13.7 फीसदी की गिरावट से भी अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेत मिलते हैं। लेकिन गर्मियों की वजह से इन दौरान सॉफ्ट ड्रिंक्स का उत्पादन 28 फीसदी बढ़ा।
वस्त्र और चमड़े से बने सामानों में भी क्रमश: 33 व 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
जून के आईआईपी आंकड़े खासा चिंताजनक हैं। औद्योगिक उत्पादन में लगातार दूसरे माह गिरावट आई है। इससे अर्थव्यवस्था में जल्द सुधार की उम्मीदों को झटका लग सकता है। मैन्यूफैक्चरिंग, खनन और इलेक्ट्रिसिटी सेक्टर की हालत खासतौर से निराश करने वाली है। रुपये को संभालने के लिए रिजर्व बैंक के सख्त मौद्रिक उपायों से मांग में गिरावट आई है। कैपिटल गुड्स व कंज्यूमर गुड्स सेक्टर भी दबाव में आ गए हैं। औद्योगिक उत्पादन को रफ्तार देने के लिए रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति में नरमी लाए। साथ ही साथ सरकार को भी जरूरी सहयोगी कदम उठाने होंगे।- चंद्रजीत बनर्जी, महानिदेशक, सीआईआई