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उद्योगों ने फिर पकड़ी बेहतर रफ्तार

Fri, 10 May 2013 10:07 PM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
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कैपिटल गुड्स, मेन्यूफेक्चरिंग व पावर सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन से उद्योगों ने अच्छी रिकवरी दिखाते हुए मार्च में एक बार फिर अच्छी रफ्तार पकड़ी।
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सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2013 में औद्यौगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) पर आधारित औद्योगिक वृद्धि दर 2.5 प्रतिशत रही। पिछले साल मार्च में आईआईपी में 2.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी।

शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2012-13 में औद्योगिक उत्पादन एक साल पहले की तुलना में सिर्फ एक प्रतिशत ऊपर रहा। इससे पिछले पिछले वित्तवर्ष के दौरान औद्योगिक वृद्धि 2.9 प्रतिशत थी।
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देश के कुल औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में तीन-चौथाई योगदान देने वाले विनिर्माण (मेन्यूफेक्चरिंग) क्षेत्र की वृद्धि दर इस बार मार्च में 3.2 प्रतिशत रही, जबकि मार्च 2012 में इस क्षेत्र के उत्पादन में 3.6 प्रतिशत की गिरावट हुई थी।

हालांकि सालाना आंकड़ों में विनिर्माण क्षेत्र में गिरावट देखने को मिली। वित्त वर्ष 2012-13 के दौरान विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर 1.2 प्रतिशत रही, जो 2011-12 के दौरान तीन प्रतिशत थी। बिजली (पावर) उत्पादन मार्च में 3.5 प्रतिशत बढ़ा, जबकि मार्च 2012 में यह 2.7 प्रतिशत बढ़ा था।

बीते वित्तवर्ष 2012-13 के दौरान बिजली उत्पादन चार प्रतिशत बढ़ा, जबकि 2011-12 में 8.2 प्रतिशत बढ़ा था। पूंजीगत वस्तुओं ( कैपिटल गुड्स) के क्षेत्र में मार्च में 6.9 फीसदी की बढ़त देखने को मिली, हालांकि सालाना तुलना करें तो मार्च 2012 में इसकी विकास दर 20.1 फीसदी के ऊंचे स्तर पर रही थी।

बीते वित्त वर्ष के दौरान इस सेक्टर में 6.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि वित्त वर्ष 2011-12 में इसमें 4 फीसदी की कमी रही थी। कैपिटल गुड्स सेक्टर में शामिल 22 में से 10 उद्योगों के उत्पादन संबंधी आंकड़े मार्च में सकारात्मक बने रहे।

इसके अलावा खनन (माइनिंग) क्षेत्र के उत्पादन में मार्च 2013 में 2.9 फीसदी की कमी आई। मार्च 2012 में इसमें एक फीसदी की गिरावट रही थी। बीते वित्त वर्ष के दौरान इस सेक्टर में 2.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2011-12 में यह गिरावट 1.9 फीसदी रही रही थी।

उपभोक्ता वस्तुओं (कंज्यूमर गुड्स) क्षेत्र की विकास दर मार्च 2013 में 1.6 फीसदी रही, जो कि मार्च 2012 में 1.1 फीसदी पर थी। वित्त वर्ष 2012-13 में इस सेक्टर में 2.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जोकि 2011-12 में 4.4 फीसदी थी।

इस बीच, इस वर्ष फरवरी के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े को आंशिक तौर पर संशोधित कर संशोधित वृद्धि दर 0.46 प्रतिशत कर दिया गया, जो पिछले महीने जारी आंकड़े में फरवरी की औद्योगिक वृद्धि 0.6 प्रतिशत बताई गई थी।

"बीते साल मार्च में 2.8 फीसदी की नकारात्मक विकास की तुलना में 2.5 फीसदी का विकास ठीक है, लेकिन चिंता की बात यह है कि खनन क्षेत्र में नकारात्मक विकास है, उसी तरह कंज्यूमर ड्यूरेबल में मांग कमजोर है। ब्याज की ऊंची दरों से ऐसा हो रहा है। सीआईआई का मानना है कि रिजर्व बैंक इस पर ध्यान देगा और आगामी मौद्रिक समीक्षा में रेपो रेट और सीआरआर में कटौती करेगा।"
- चंद्रजीत बनर्जी, डीजी, सीआईआई

"उत्पादन के क्षेत्र में नकारात्मक आंकड़े से 3.2 फीसदी सकारात्मक होने को मैन्यूफैक्चरिंग में फिलहाल रिवाइवल नहीं माना जा सकता। व्यापक तौर आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती और उपभोक्ता मांग में उठाव नहीं बढ़ने से मैन्यूफैक्चरिंग प्रभावित रहा। 2012-13 में बिजली क्षेत्र में कमी चिंता का मुद्दा है।"
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- नैना लाल किदवई, प्रेसिडेंट, फिक्की

"मार्च 2013 में आईआईपी में मामूली बढ़ोतरी रही लेकिन नवंबर 2012 से उपभोक्ता कैटिगरी में धीमापन रही। 2014 में बेहतर मानसून से उपभोक्ता मांग बढ़ सकती है। परियोजनाओं के जल्द लागू होने और भूमि अधिग्रहण जैसे मुद्दे सीधे तौर पर विकास की गति के फिर से पटरी पर आने में उत्प्रेरक का काम करेंगे।"
- अदिति नायर, सीनियर इकोनॉमिस्ट, इक्रा लिमिटेड
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