देश भर में फैले डाकघर अब बैंक बनने जा रहे हैं। भारतीय डाक विभाग ने बैंकिंग लाइसेंस के लिए आवेदन कर दिया है। विभाग ने बृहस्पतिवार को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के समक्ष लाइसेंस हासिल करने के लिए आवेदन कर दिया है।
डाक विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सभी प्रकार की बैंकिंग सेवाएं देने के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन कर दिया गया है। इसके बाद विभाग कैबिनेट की मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजेगा।
कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही डाकघरों के बैंक बनने का रास्ता साफ हो जाएगा। देश भर में 1.50 लाख से ज्यादा डाकघर हैं। इनमें से 90 फीसदी से ज्यादा डाकघर ग्रामीण इलाकों में हैं।
लिहाजा, अगर डाकघरों के बैंक बनने का रास्ता साफ हो जाएगा, तो यह देश का सबसे बड़ा बैंकिंग नेटवर्क होगा। अधिकारी ने बताया कि डाक विभाग शुरुआत में 50 ब्रांचों के साथ बैंक की शुरुआत करना चाहता है। इसके बाद अगले पांच वर्षों के दौरान इस संख्या को 150 करने का इरादा है।
डाक विभाग को बैंकिंग लाइसेंस मिलने के बाद कैबिनेट की मंजूरी अहम है। इसके लिए जो प्रस्ताव डाक विभाग ने तैयार किया है, उसके मुताबिक बैंक की शुरुआत करने के लिए 1,900 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। इसमें से 500 करोड़ रुपये की पेड-अप कैपिटल होगी, जो कि किसी को भी बैंक की शुरुआत करने के लिए नए बैंकिंग लाइसेंस नियमों के तहत जरूरी है।
अधिकारी ने बताया कि फिलहाल डाक विभाग के पास 4.25 करोड़ से ज्यादा बचत खाते हैं, जो कि किसी भी बैंक के मुकाबले कहीं ज्यादा हैं। इसके अलावा डाक विभाग की सबसे बड़ी खूबी है उसका देशभर में फैला नेटवर्क। यह नेटवर्क देश में सभी बैंकों के नेटवर्क से भी बड़ा है।
वहीं, सरकार की वित्तीय समावेश की योजना को डाकघरों के जरिए काफी तेजी के साथ बढ़ावा दिया जा सकता है। इसलिए, डाकघरों का बैंकों में तब्दील होना बेहद फायदेमंद होगा।