देश में उपभोक्ताओं का भरोसा पिछले साल के मुकाबले 2012 की तीसरी तिमाही में कमजोर हुआ है। नील्सन की रिपोर्ट के मुताबिक, 62 फीसदी उपभोक्ताओं ने माना कि मौजूदा तिमाही में देश की अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से गुजर रही है। फिर भी भारत और इंडोनेशिया में उपभोक्ताओं का भरोसा ग्लोबल स्तर पर बेहतर है।
नील्सन ग्लोबल उपभोक्ता भरोसा सूचकांक के मुताबिक 2012 की मौजूदा तिमाही में भारतीय उपभोक्ताओं में सकारात्मक नजरिया 2011 की समान अवधि की तुलना में तीन अंक नीचे गिरा है। रिपोर्ट के मुताबिक, पांच में तीन ऑनलाइन उपभोक्ताओं (करीब 62 फीसदी) का मानना है कि इस तिमाही में अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से गुजर रही है। जबकि, 2011 की इसी तिमाही में 44 फीसदी उपभोक्ताओं ने आर्थिक मंदी के हालात जाहिर किए थे। 2012 की तीसरी तिमाही में भारत और इंडोनेशिया का सूचकांक ग्लोबल स्तर पर सबसे अधिक 119 अंक रहा, जबकि फिलीपिंस का सूचकांक 118 के स्तर पर रहा।
नील्सन इंडिया क्षेत्र के प्रेसिडेंट पीयूष माथुर ने बताया कि साल की दूसरी तिमाही के दौरान भारतीय उपभोक्ताओं के बीच आर्थिक वृद्धि को लेकर उत्सुकता दिखाई दी थी। तीसरी तिमाही के दौरान भी सेंटीमेंट बेहतर है। हालांकि, आर्थिक सुस्ती के साथ बढ़ती महंगाई का दबाव उपभोक्ता सूचकांक पर दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं को भरोसा है कि चुनौतियों का समाधान निकल लिया जाएगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, देश में ऑनलाइन सर्वे में शामिल 77 फीसदी उपभोक्ता अपनी नौकरी को लेकर आशान्वित हैं। लेकिन, यह आंकड़ा पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 81 फीसदी कम है।